Saturday, May 31, 2014

भारत दुनिया का दूसरा सबसे अमीर देश बन सकता है

चाय नहीं थी तो क्या सब सुस्त और आलसी थे
सुबह खडे नही हो पाते थे ?
-कोलगेट नही था तो क्या भारत में
पति पत्नी साथ नही सोते थे ?
- क्रिकेट नही था तो क्या भारतीय खेलते
ही नही थे ?...
- वैलेनटाइन नही था तो क्या भारतीय प्रेम
नही करते थे ?
- फेयरलवली नही थी तो क्या सब भारतीय
नारी काली थी ?
- स्कर्ट नही थी तो क्या भारत में
लडकियां पढती नही थी ?े
- डिस्को नही था तो क्या भारत में संगीत
नही था ?
- ओह माई गोड शब्द
नही था तो क्या भारतीय भगवान नही मानते
थे ?
- लाइफ बाय लक्स नहीं था तो भारतीय गले सडे
रहते थे ?
- पैंटीन नही था तो क्या सब गंजे हो जाते थे ?
- अंग्रेजी नही थी तो क्या भारत में कोई
ज्ञानी नही था ?
स्वदेशी अपनाए देश बचाएे
अगर सभी भारतीय 90 दिन तक
कोई भी विदेशी सामान नहीं ख़रीदे...
तो भारत दुनिया का दूसरा सबसे
अमीर देश बन सकता है..
सिर्फ 90 दिन में ही भारत के
2 रुपये 1 डॉलर के बराबर हो जायेंगे..
हम सबको मिल कर
ये कोशिश आजमानी चाहिए
क्युकी ये देश है हमारा..!!!!
.इसे  इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत इसे पढ़े ... और एक आन्दोलन बन जाय……!!
यूरोप, अमेरिका ने
भारतीय आम को
जहरीला बताकर
उसके आयात को
बेन कर दिया.
🍋🍋🍋🍋
और हम
जहरीले पेप्सी,
कोका कोला का
मजे से सेवन कर रहे है।
🍹🍹🍹🍹🍹
यदि करोडो
भारतीय किसानो को
आत्महत्या करने से
बचाना हो तो फ्रूट और
फ्रेश फ्रूट जूस का
सेवन करे

गुरु ये ट्रक, और कई वाहनों के पीछे क्या - क्या डायलोग लिखा होता है..

गुरु ये ट्रक, और कई वाहनों के पीछे क्या - क्या डायलोग लिखा होता है..
कभी कभी तो पढ़कर ही सफ़र की थकान भाग जाती है और चेहरे पर मुस्कान आ जाती है
.
जहाँ तक मैने पढा है...
1. माँ का आशीर्वाद
.
2. "मिलेगा मुकद्दर"
.
3. "जय शेरां वाली"
.
4. "Jaat Risky, After Whiskey"
.
5. AVIOD GIRLS SAVE PETROL
.
6. एक टाटा वैन के पीछे लिखा था - हम दो, हमारे दो । और उसी के नीचे रंगीन अक्षरों में लिखा था : "सोनू, मोनू, पिंकी, गुड्डी & चिंकी दे पापा दी गड्डी
.
7. या तो न्यूऐ चाल्लेगी...
.
8. एक टाटा मैजिक के पीछे देखा (जिसे आप छोटा हाथी के नाम से भी जानते है ) "पापा मैं भी बड़ा होकर ट्रक बनुगा"
.
9. धीरे चलाओ, घर पर कोई आपका इन्तजार कर रहा है"
.
10. एक बच्चों की स्कूल बस ''मुझेना छेड़ मैं तो बच्चों वाली हू''
.
11. Diesel Tank पर ये ....
१=नोटों का दुश्मन:)
२=इराक का पानी
३=खुराक मंत्री
४=खान पान विभाग
.
12. एक ट्रक के पीछे '' यो गया तेरा फूफा''
.
13. एक ट्रक पे लिखा था : "बुरी नज़र वाले आँख का ऑपरेशन करा ले
.
14. बुरी नजर वाले तेरी लुगाई भागे
.
15. करले बेटा ड्राइवरी, फूटे तेरे करम खाना मिले कभी कभी, सोना अगले जन्म
.
16. चल भाग बसन्ति पीछे कई घोड़े हिनहिना रहे है / इज्जत का सवाल है
.
17. हँसने वालो का भाई और जलने वालो का जमाई
.
18. एक बीस टायर के ट्रोले के पीछे लिखा था --> हाय राम .......कितना लंबा :
.
19. एक ट्रक के पीछे लिखा था: --"जलो मत भाई गाड़ी किश्तों मे ली है
.
20. ट्रक के पीछे लिखा देखा - समय से पहले भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता
.
21. एक भुंडभुडिया कै पाच्छै लिख राख्या था -" ये तूफान कहीं भी आ सकता है"
और सब तै फाडू....
.
22. बुरी नज़र वाले तू पाकिस्तान चला जा

.
23.दम है तो पास कर, वरना बर्दाश्त कर
.
24.दुल्हन ही दहेज़ है।
.
25.“अमीरों की ज़िन्दगी,बिस्कुट और केक पर,ड्राईवर की ज़िन्दगी, क्लच औरब्रेक पर.
.
26.जलो मत भाई गाड़ी किश्तों मे ली है
.
27.ek motor sycle ke piche likha tha ससुराल की तरफ से सप्रेम भेट
.

delhi police

My frindz plz read a real story what i faced from delhi police i don't want to like. and comment on the same but if you really want to fight gainst the same so plz share it plz...

Dear sir/madam

This an information about one of you sub inspector of police station (hari nagar) west zone name surrender singh ahlawat,
On 10th of august 2013 I I have reached at hari nagar depot in front of muthoot fincorp limited via tilak nagar somewhere around 6.20pm might be a group of police man was on routine inspection of the area when they were passing me a traffic police man asked me about my bike so I said yes this is my bike and he said I have punish you because your rear number plate is defected when I saw that I found that some sticker was peeled off and I don’t know how I requested him that I’ll make it done right now so he said I have to give you a Chelan some of rupees 100/- I said ok if you don’t trust on me so I am ready to get punished during that conversation one police man name rajender singh said no I will impound your vehicle I said if I am agree to get punished and I have all the documents with me so please don’t do it because I am doing a small field job and without bike I cannot survive in my company but he said my senior said the bike has to be impound when asked to his senior he didn’t say anything I requested end no. of times to them but they did not listen me.

When const. rejender singh moved from there with my bike I called 100 regarding the same they told me that we are forwarding your problem to the higher authorities after sometimes some policeman called me ask me to come at police booth of harinagar when I went there he said request to S.H.O. regarding the same I said I requested already.

So overall harassment nobody has helped me at the same time after that I went to police station harinagar and asked to release my bike so someone was on reception said you need to get the ACP permission to get your bike I said when I was whole the documents with me and if there was a traffic police man available with his Chelan book so why they people harassed me in the mean while the sub inspector Mr. surender singh ahlawat came and said that I get to know that you are the investigation officer appointed for me he asked me “what is my name” after hiding his name plate I said Mr. surrender so he said there is two surender which one you want then he asked to his colleges they people said today only you are posted here. And one of the police man said this the person who called on 100 so he started shout on me and said “hame teri bike lawaris padi mili hai or mai tujhe dikha sakta hu, waise dekhne ki authority nahi hai tujhe” I said I don’t want to see this but I have the proofs with me that your police man had took my bike in front of huge group of public and your police team.

So he was talking to me very rudely and talking to me about here and there I just asked two questions that when I was whole the documents with me why they didn’t check ??? and if there was a defect in the number plate so why they did not punished me ???

So he said “agar complaint karni hai to india mai mat kariyo obama k paas kariyo waha hogi teri sunwai or nahi karte ham Chelan hamari gundagardi hai hamari dadagiri hai bas mai surender singh ahlawat ye baat bol raha hu or tere paas to camera phone hai photo bhi lele meri”

After all this I moved from there because I felt if I stay some more time so he could beat me unnecessary.
And one more bad thing happened with me I have lost my job just because of that harassment.

I just want to know…

1. Don’t we have the rites to present our problems ?
2. Don’t we have the rites to ask about the law and order ?
3. Don’t we have the rites to approach at PCR 100 ?
4. Only the policeman have the rites harass the people ?
5. Only the policeman have the rites to abuse the people ?
6. Only the policeman have the rights to break the own rules and regulations ?
7. How can we trust on police that they help us ?
8. Just because of lack of discipline the policeman harass, misbehave, abuse, insult the people.


Respected and ownarable all do something strict and strong against the same because public is very scare from police then criminals.

I have a video avidance regarding the same without knowing Mr. surrender singh ahlawat so I expect some help from you.

Regards
Deepak verma



https://www.facebook.com/photo.php?v=1467645860131058&fref=nf

अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट खुदा जैसा

यह घटना सन् 1270-1280 के बीच की है । दिल्ली में बादशाह
बलबन का राज्य था । उसके दरबार में एक अमीर
दरबारी था जिसके तीन बेटे थे । उसके पास उन्नीस घोड़े भी थे ।
मरने से पहले वह वसीयत लिख गया कि इन
घोड़ों का आधा हिस्सा... बड़े बेटे को, चौथाई हिस्सा मंझले
को और पांचवां हिस्सा सबसे छोटे बेटे को बांट दिया जाये ।
बेटे उन 19 घोड़ों का इस तरह बंटवारा कर ही नहीं पाये और
बादशाह के दरबार में इस समस्या को सुलझाने के लिए अपील
की । बादशाह ने अपने सब दरबारियों से सलाह ली पर उनमें से
कोई भी इसे हल नहीं कर सका ।
उस समय प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो बादशाह
का दरबारी कवि था । उसने हरयाणा के लोगों की वीर
भाषा को समझाने के लिए एक पुस्तक भी बादशाह के कहने पर
लिखी थी जिसका नाम “खलिक बारी” था । खुसरो ने कहा कि मैंने
हरयाणा में खूब घूम कर देखा है और पंचायती फैसले भी सुने हैं
और सर्वखाप पंचायत का कोई पंच ही इसको हल कर सकता है ।
नवाब के लोगों ने इन्कार किया कि यह
फैसला तो हो ही नहीं सकता पर परन्तु कवि अमीर खुसरो के कहने
पर बादशाह बलबन ने सर्वखाप पंचायत में अपने एक खास
आदमी को चिट्ठी देकर सौरम गांव (जिला मुजफ्फरनगर)
भेजा (इसी गांव में शुरू से सर्वखाप पंचायत का मुख्यालय
चला आ रहा है और आज भी मौजूद है) ।
चिट्ठी पाकर पंचायत ने प्रधान पंच चौधरी रामसहाय
को दिल्ली भेजने का फैसला किया । चौधरी साहब अपने घोड़े पर
सवार होकर बादशाह के दरबार में दिल्ली पहुंच गये और बादशाह
ने अपने सारे दरबारी बाहर के मैदान में इकट्ठे कर लिये । वहीं पर
19 घोड़ों को भी लाइन में बंधवा दिया ।
चौधरी रामसहाय ने अपना परिचय देकर कहना शुरू किया -
“शायद इतना तो आपको पता ही होगा कि हमारे यहां राजा और
प्रजा का सम्बंध बाप-बेटे का होता है और प्रजा की सम्पत्ति पर
राजा का भी हक होता है । इस नाते मैं जो अपना घोड़ा साथ
लाया हूं, उस पर भी राजा का हक बनता है । इसलिये मैं यह
अपना घोड़ा आपको भेंट करता हूं और इन 19 घोड़ों के साथ
मिला देना चाहता हूं, इसके बाद मैं बंटवारे के बारे में
अपना फैसला सुनाऊंगा ।”
बादशाह बलबन ने इसकी इजाजत दे दी और चौधरी साहब ने
अपना घोड़ा उन 19 घोड़ों वाली कतार के आखिर में बांध दिया,
इस तरह कुल बीस घोड़े हो गये ।
अब चौधरी ने उन घोड़ों का बंटवारा इस तरह कर दिया -
- आधा हिस्सा (20 ¸ 2 = 10) यानि दस घोड़े उस अमीर के बड़े
बेटे को दे दिये ।
- चौथाई हिस्सा (20 ¸ 4 = 5) यानि पांच घोडे मंझले बेटे को दे
दिये ।
- पांचवां हिस्सा (20 ¸ 5 = 4) यानि चार घोडे छोटे बेटे को दे
दिये ।
इस प्रकार उन्नीस (10 + 5 + 4 = 19)
घोड़ों का बंटवारा हो गया । बीसवां घोड़ा चौधरी रामसहाय
का ही था जो बच गया ।
बंटवारा करके चौधरी ने सबसे कहा - “मेरा अपना घोड़ा तो बच
ही गया है, इजाजत हो तो इसको मैं ले जाऊं ?”
बादशाह ने हां कह दी और चौधरी का बहुत सम्मान और तारीफ
की । चौधरी रामसहाय अपना घोड़ा लेकर अपने गांव सौरम
की तरफ कूच करने ही वाले थे, तभी वहां पर मौजूद कई हजार
दर्शक इस पंच फैसले से गदगद होकर नाचने लगे और कवि अमीर
खुसरो ने जोर से कहा - “अनपढ़ जाट पढ़ा जैसा, पढ़ा जाट
खुदा जैसा”।
सारी भीड़ इसी पंक्ति को दोहराने लगी । तभी से यह कहावत सारे
हरयाणा और दूसरी जगहों में फैल गई ।
यहां यह बताना भी जरूरी है कि 19 घोड़ों के बंटवारे के समय
विदेशी यात्री और इतिहासकार इब्न-बतूत भी वहीं दिल्ली दरबार
में मौजूद था । यह वृत्तांत सर्वखाप पंचायत के अभिलेखागार में
मौजूद है ।

Friday, May 30, 2014

एक थी नीरजा


एक थी नीरजा 

5 सितम्बर 1986 को आधुनिक भारत की एक विरांगना जिसने इस्लामिक आतंकियों से लगभग 400 यात्रियों को जान बचाते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया। भारत के कितने नवयुवक और नवयुवतियां उसका नाम जानते है।
कैटरिना कैफ, करीना कपूर, प्रियंका चैपड़ा, दीपिका पादुकोड़, विद्याबालन और अब तो सनी लियोन जैसा बनने की होड़ लगाने वाली युवती क्या नीरजा भनोत का नाम जानती है। नहीं सुना न ये नाम। मैं बताता हूँ इस महान विरांगना के बारे में। 7 सितम्बर 1964 को चंड़ीगढ़ के हरीश भनोत जी के यहाँ जब एक

बच्ची का जन्म हुआ था तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि भारत का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान इस बच्ची को मिलेगा। बचपन से ही इस बच्ची को वायुयान में बैठने और आकाश में उड़ने की प्रबल इच्छा थी।
नीरजा ने अपनी वो इच्छा एयर लाइन्स पैन एम ज्वाइन करके पूरी की। 16 जनवरी 1986 को नीरजा को आकाश छूने वाली इच्छा को वास्तव में पंख लग गये थे। नीरजा पैन एम एयरलाईन में बतौर एयर होस्टेज का काम करने लगी। 5 सितम्बर 1986 की वो घड़ी आ गयी थी जहाँ नीरजा के जीवन की असली परीक्षा की बारी थी। पैन एम 73 विमान करांची, पाकिस्तान के एयरपोर्ट पर अपने पायलेट का इंतजार कर रहा था। विमान में लगभग 400 यात्री बैठे हुये थे। अचानक 4 आतंकवादियों ने पूरे विमान को गन प्वांइट पर ले लिया। उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर दबाव बनाया कि वो जल्द में जल्द विमान में पायलट को भेजे। किन्तु पाकिस्तानी सरकार ने मना कर दिया। तब आतंकियांे ने नीरजा और उसकी सहयोगियों को बुलाया कि वो सभी यात्रियों के पासपोर्ट एकत्रित करे ताकि वो किसी अमेरिकन नागरिक को मारकर पाकिस्तान पर दबाव बना सके। नीरजा ने सभी यात्रियों के पासपोर्ट एकत्रित किये और विमान में बैठे 5 अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट छुपाकर बाकी सभी आतंकियों को सौंप दिये। उसके बाद आतंकियों ने एक ब्रिटिश को विमान के गेट पर लाकर पाकिस्तानी सरकार को धमकी दी कि यदि पायलट नहीं भेजे तो वह उसको मार देगे। किन्तु नीरजा ने उस आतंकी से बात करके उस ब्रिटिश नागरिक को भी बचा लिया। धीरे-धीरे 16 घंटे बीत गये। पाकिस्तान सरकार और आतंकियों के बीच बात का कोई नतीजा नहीं निकला। अचानक नीरजा को ध्यान आया कि प्लेन में फ्यूल किसी भी समय समाप्त हो सकता है और उसके बाद अंधेरा हो जायेगा। जल्दी उसने अपनी सहपरिचायिकाओं को यात्रियों को खाना बांटने के लिए कहा और साथ ही विमान के आपातकालीन द्वारों के बारे में समझाने वाला कार्ड भी देने को कहा। नीरजा को पता लग चुका था कि आतंकवादी सभी यात्रियों को मारने की सोच चुके हैं।
उसने सर्वप्रथम खाने के पैकेट आतंकियों को ही दिये क्योंकि उसका सोचना था कि भूख से पेट भरने के बाद शायद वो शांत दिमाग से बात करे। इसी बीच सभी यात्रियों ने आपातकालीन द्वारों की पहचान कर ली। नीरजा ने जैसा सोचा था वही हुआ। प्लेन का फ्यूल समाप्त हो गया और चारो ओर अंधेरा छा गया। नीरजा तो इसी समय का इंतजार कर रही थी। तुरन्त उसने विमान के सारे आपातकालीन द्वार खोल दिये। योजना के अनुरूप ही यात्री तुरन्त उन द्वारों के नीचे कूदने लगे। वहीं आतंकियों ने भी अंधेरे में फायरिंग शुरू कर दी। किन्तु नीरजा ने अपने साहस से लगभग सभी यात्रियों को बचा लिया था। कुछ घायल अवश्य हो गये थे किन्तु ठीक थे अब विमान से भागने की बारी नीरजा की थी किन्तु तभी उसे बच्चों के रोने की आवाज सुनाई दी। दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना के कमांडो भी विमान में आ चुके थे। उन्होंने तीन आतंकियों को मार गिराया। इधर नीरजा उन तीन बच्चों को खोज चुकी थी और उन्हें लेकर विमान के आपातकालीन द्वार की ओर बढ़ने लगी। कि अचानक बचा हुआ चैथा आतंकवादी उसके सामने आ खड़ा हुआ। नीरजा ने बच्चों को आपातकालीन द्वार की ओर धकेल दिया और स्वयं उस आतंकी से भिड़ गई। कहाँ वो दुर्दांत आतंकवादी और कहाँ वो 23 वर्ष की पतली-दुबली लड़की। आतंकी ने कई गोलियां उसके सीने में उतार डाली। नीरजा ने अपना बलिदान दे दिया। उस चैथे आतंकी को भी पाकिस्तानी कमांडों ने मार गिराया किन्तु वो नीरजा को न बचा सके। नीरजा भी अगर चाहती तो वो आपातकालीन द्वार से सबसे पहले भाग सकती थी। किन्तु वो भारत माता की सच्ची बेटी थी। उसने सबसे पहले सारा विमान खाली कराया और स्वयं को उन दुर्दांत राक्षसों के हाथों सौंप दिया। नीरजा के बलिदान के बाद भारत सरकार ने नीरजा को सर्वोच्च नागरिक सम्मान अशोक चक्र प्रदान किया तो वहीं पाकिस्तान की सरकार ने भी नीरजा को तमगा-ए-इन्सानियत प्रदान किया। नीरजा वास्तव में स्वतंत्र भारत की महानतम विरांगना है। ऐसी विरागना को मैं कोटि-कोटि नमन करता हूँ। 
(2004 में नीरजा भनोत पर टिकट भी जारी हो चुका है।)

See Reality in your plan success


गुजरात दंगे का सच

गुजरात दंगे का सच आज जहा देखो वहा गुजरात के दंगो के बारे
में ही सुनने और देखने को मिलता है फिर चाहे वो गूगल
हो या फेसबुक हो या फिर टीवी चैनेल | रोज रोज नए खुलाशे
हो रहे हैं | रोज गुजरात की सरकार को कटघरे में
खड़ा किया जाता है| सबका निशाना केवल एक नरेन्द्र मोदी |
जिसे देखो वो अपने को को जज दिखाता है| हर कोई सेकुलर के
नाम पर एक ही स्वर में गुजरात दंगो की भर्त्सना करते हैं |
कारसेवको को मारने के लिए ट्रेन को जलाने की कई दिनों से
योजना बन रही थी-
साबरमती ट्रेन हादसे में मौत की सजा प्राप्त अब्दुल रजाक
कुरकुर के अमन गेस्टहाउस पर ही कारसेवको को जिन्दा जलाने
की कई हप्तो से योजना बनी थी ... इसके गेस्टहाउस से कई
पीपे पेट्रोल बरामद हुए थे |
पेट्रोल पम्प के कर्मचारीयो ने भी कई मुसलमानों को महीने से
पीपे में पेट्रोल खरीदने की बात कही थी और उन्हें पहचान परेड
में पहचाना भी था .. पेट्रोल को सिगनल फालिया के पास और
अमन गेस्टहाउस में जमा किया जाता था |
गोधरा से तत्कालीन सहायक स्टेशन मास्टर के
द्वारा वडोदरा मंडल ट्रेफिक कंट्रोलर को भेजी गयी गुप्त
रिपोर्ट ::-
गोधरा के तत्कालीन सहायक स्टेशन मास्टर राजेन्द्र मीणा ने
वडोदरा मंडल के ट्रेफिक कंट्रोलर को आरपीएफ के गुप्तचर
शाखा के जानकारी के आधार पर एक रिपोर्ट भेजी थी जिसमे
उन्होंने कहा था की गोधरा आउटर पर किसी भी सवारी ट्रेन
को रोकना और खासकर अयोध्या जाने वाली या आने
वाली साबरमती एक्सप्रेस को रोकना बहुत खतरनाक
होगा क्योकि कुछ संदिग्ध लोग कारसेवको को नुकसान पहुचाने
की योजना बना रहे है उन्होंने लिखा था की ट्राफिक को इस तरह
से कंट्रोल किया जाए की साबरमती ट्रेन को आउटर पर रुकना न
पड़े
गौरतलब है की जिस जगह यानी सिगनल फलिया पर
साबरमती ट्रेन को जलाया गया था ठीक उसी जगह पर 28
November 1990 को पांच हिन्दू टीचरों को जलाकर
मारा गया था जिसमे दो महिला टीचर थी ..इस केस में भी बीस
मुसलमानों को आरोपी पाया गया था
आखिर ट्रेन हादसे के दो दिनों के बाद गुजरात में दंगे
क्यों भडके ?
मित्रो कभी आपने सोचा है कि जब ट्रेन 27 फरवरी को जलाई
गयी तो गुजरात में पहली हिंसा दो दिन के बाद यानी 29
फरवरी को क्यों हुई ?
मित्रो साबरमती हादसे की किसी भी मुस्लिम सन्गठन ने
निंदा नही की .. उलटे जमायत ये इस्लामी हिन्द के तत्कालीन
प्रमुख ने इसके लिए कारसेवको को ही जिम्मेदार ठहरा दिया ..
शबाना आजमी ने भी कहा की कारसेवको को उनके किये
की सजा मिली है ..आखिर क्या जरूरत थी अयोध्या जाने
की ...तीस्ता जावेद सेतलवाड और मल्लिका साराभाई और
शबनम हाश्मी ने एक संयुक्त प्रेस कांफेरेस के कहा की हमे ये
नही भूलना चाहिए की वो कार सेवक किसी नेक मकसद के
नही गये थे बल्कि विवादित जगह पर मन्दिर बनाने गये थे |
मशहूर पत्रकार वीर संघवी ने भी इंडियनएक्सप्रेस में एक
आर्टिकल लिखा था ""they condemn the crime, but
blame the victims" उन्होंने लिखा था की ऐसे बयानों ने
हिन्दुओ को झकझोर दिया था |
जब भी मीडिया गुजरात दंगो की बात करता है तब वो दंगे भडकने
के पहले और गोधरा ट्रेन हादसे के बाद 27 February 2002
को गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और बड़े कांग्रेसी नेता अमरसिंह
चौधरी का टीवी पर आकर दिया गया बयान क्यों नही दिखाता ?
मित्रो, अमरसिंह चौधरी ने साबरमती ट्रेन हादसे
की निंदा नही की बल्कि उलटे वो कारसेवको को कोसने लगे और
मृत कारसेवको के बारे में अनाप सनाप बकने लगे .. और
कहा की ये लोग खुद अपनी मौत के जिम्मेदार है ..
इन सब बातो ने गुजरात की जनता को भडकाने का काम लिया ..
अब सवाल उठता है की गुजरात दंगा हुआ क्यों ? 27
फरवरी 2002 साबरमती ट्रेन के
बोगियों को जलाया गया गोधरा रेलवे स्टेशन से करीब ८२६ मीटर
की दुरी पर स्थित जगह सिगनल फालिया पर | इस ट्रेन में जलने
से 58 लोगो को मौत हुई | 25 औरते और 19 बच्चे भी मारे गये
|
प्रथम दृष्टया रहे वहा के 14 पुलिस के जवान जो उस समय
स्टेशन पर मौजूद थे और उनमे से ३ पुलिस वाले घटना स्थल पर
पहुचे और साथ ही पहुचे अग्नि शमन दल के एक जवान
सुरेशगिरी गोसाई जी | अगर हम इन चारो लोगो की माने
तो म्युनिसिपल काउंसिलर हाजी बिलाल भीड़ को आदेश दे रहे थे
ट्रेन के इंजन को जलने का| साथ ही साथ जब ये जवान आग
बुझाने की कोशिस कर रहे थे तब ट्रेन पर पत्थरबाजी चालू कर
दी गई भीड़ के द्वारा| अब इसके आगे बढ़ कर देखे तो जब
गोधरा पुलिस स्टेशन की टीम पहुची तब २ लोग १०,००० की भीड़
को उकसा रहे थे ये थे म्युनिसिपल प्रेसिडेंट मोहम्मद
कलोटा और म्युनिसिपल काउंसिलर हाजी बिलाल|
अब सवाल उठता है की मोहम्मद कलोटा और हाजी बिलाल
को किसने उकसाया और ये ट्रेन को जलाने क्यों गए?
असल में गोधरा की मुख्य मस्जिद का मौलाना मौलवी हाजी उमर
जी ही इस कांड का मुख्य आरोपी पाया गया और उसे अदालत ने
फांसी की सजा दी ..जिसे बाद में आजीवन कारावास में तब्दील
किया गया | दुसरे आरोपीयो ने विभिन्न जाँच एजेंसियों और
कोर्ट में बताया की मौलाना उमरजी कई हप्तो से मस्जिद में
नमाज के बाद भडकाऊ तकरीर देता था और कहता था की हमे
बदला लेना है ..इन कारसेवको ने बाबरी मस्जिद तोड़ी है इसलिए
हर मुसलमान का फर्ज है की वो बदला ले |
सवालो के बाढ़ यही नहीं रुकते हैं बल्कि सवालो की लिस्ट
अभी लम्बी है|
अब सवाल उठता है की क्यों मारा गया ऐसे राम भक्तो को| कुछ
मीडिया ने बताया की ये मुसलमानों को उकसाने वाले नारे
लगा रहे....अब क्या कोई बताएगा की क्या भगवान राम के भजन
मुसलमानों को उकसाने वाले लगते हैं?
लेकिन इसके पहले भी एक हादसा हुआ २७ फ़रवरी २००२
को सुबह ७:४३ मिनट ४ घंटे की देरी से जैसे ही साबरमती ट्रेन
चली और प्लेटफ़ॉर्म छोड़ा तो प्लेटफ़ॉर्म से १०० मीटर
की दुरी पर ही १००० लोगो की भीड़ ने ट्रेन पर पत्थर चलाने
चालू कर दिए पर यहाँ रेलवे की पुलिस ने भीड़ को तितर बितर
कर दिया और ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया| पर जैसे
ही ट्रेन मुस्किल से ८०० मीटर चली अलग अलग बोगियों से कई
बार चेन खिंची गई |
बाकि की कहानी जिसपर बीती उसकी जुबानी | उस समय
मुस्किल से १५-१६ साल की बच्ची की जुबानी |
ये बच्ची थी कक्षा ११ में पढने वाली गायत्री पंचाल जो की उस
समय अपने परिवार के साथ अयोध्या से लौट रही थी की माने
तो ट्रेन में राम धुन चल रहा था और ट्रेन जैसे ही गोधरा से आगे
बढ़ी एक दम से रोक दिया गई चेन खिंच कर | उसके बाद देखने में
आया की एक भीड़ हथियारों से लैस हो कर ट्रेन की तरफ बढ़
रही है | हथियार भी कैसे लाठी डंडा नहीं बल्कि तलवार, गुप्ती,
भाले, पेट्रोल बम्ब, एसिड बल्ब्स और पता नहीं क्या क्या |
भीड़ को देख कर ट्रेन में सवार यात्रियों ने खिड़की और दरवाजे
बंद कर लिए पर भीड़ में से जो अन्दर घुस आए थे वो कार
सेवको को मार रहे थे और उनके सामानों को लूट रहे थे और साथ
ही बहार खड़ी भीड़ मरो-काटो के नारे लगा रही थी | एक लाउड
स्पीकर जो की पास के मस्जिद पर था उससे बार बार ये आदेश
दिया जा रहा था की "मारो, काटो. लादेन ना दुश्मनों ने मारो" |
साथ ही बहार खड़ी भीड़ ने पेट्रोल डाल कर आग लगाना चालू
कर दिया जिससे कोई जिन्दा ना बचे| ट्रेन की बोगी में चारो तरफ
पेट्रोल भरा हुआ था| दरवाजे बहार से बंद कर दिए गए थे
ताकि कोई बहार ना निकल सके| एस-६ और एस-७ के वैक्यूम
पाइप कट दिया गया था ताकि ट्रेन आगे बढ़ ही नहीं सके|
जो लोग जलती ट्रेन से बहार निकल पाए कैसे भी उन्हें काट
दिया गया तेज हथियारों से कुछ वही गहरे घाव की वजह से मारे
गए और कुछ बुरी तरह घायल हो गए|
गोधरा फायर सर्विस के जवानो का बयान
नानावती औरशाह आयोग को दिए अपने बयानों में फायर बिग्रेड
के लोगो ने कहा की जबहमे सुचनामिली की ट्रेन जलाई गयी है
तो हम तुरंत पहुचे लेकिन सिग्लन फालिया के पास कई मुस्लिम
महिलाये और बच्चे हमारा सामने लेट गये ..और कई लोग
चिल्ला रहे थे की इनको तब तक मत जाने देना जबतक की ट्रेन
पूरी तरह जल न जाये |
हिन्दू सड़क पर उतारे 29 फ़रवरी 2002 के दोपहर से |
पूरा दो दिन हिन्दू शांति से घरो में बैठा रहा| अगर
वो दंगा हिंदुवो या मोदी को करना था तो 27 फ़रवरी 2002
की सुबह 8 बजे से क्यों नहीं चालू हुआ? जबकि मोदी ने 28
फ़रवरी 2002 की शाम को ही आर्मी को सडको पर लाने
का आदेश दिया जो की अगले ही दिन १ मार्च २००२
को हो गया और सडको पर आर्मी उतर आयी गुजरात को जलने
से बचाने के लिए | पर भीड़ के आगे आर्मी भी कम पड़
रही थी तो १ मार्च २००२ को ही मोदी ने अपने पडोसी राज्यों से
सुरक्षा कर्मियों की मांग करी| ये पडोसी राज्य थे महाराष्ट्र
(कांग्रेस शासित- विलाश राव देशमुख मुख्य मंत्री), मध्य प्रदेश
(कांग्रेस शासित- दिग विजय सिंह मुख्य मंत्री), राजस्थान
(कांग्रेस शासित- अशोक गहलोत मुख्य मंत्री) और पंजाब
(कांग्रेस शासित- अमरिंदर सिंह मुख्य मंत्री) |
क्या कभी किसी ने भी इन माननीय मुख्यमंत्रियों से एक बार
भी पुछा की अपने सुरक्षा कर्मी क्यों नहीं भेजे गुजरात में
जबकि गुजरात ने आपसे सहायता मांगी थी | या ये एक
सोची समझी गूढ़ राजनीती द्वेष का परिचायक था इन प्रदेशो के
मुख्यमंत्रियों का गुजरात को सुरक्षा कर्मियों का ना भेजना|
साबरमती ट्रेन हादसा और लालूप्रसाद यादव
की घटिया राजनीती जो बाद में गलत साबित हुई
साबरमती ट्रेन हादसे के ढाई साल के बाद जब घटिया और नीच
सोच रखने वाले लालूप्रसाद यादव रेलमंत्री बने तो उन्होंने इस
हादसे पर अपनी नीच और गिरी हुई राजनितिक रोटी सेकने के
लिए रेलवे के द्वारा बनर्जी आयोग बनाया .. और इस आयोग
को पहले ही बता दिया गया था की आपको क्या रिपोर्ट देनी है |
असल में कुछ महीनों के बाद बिहार विधानसभा के चुनाव होने
वाले थे और लालूप्रसाद यादव चाहते थे
की किसी भी हिंदूवादी दल को इसका फायदा न मिले
बल्कि हिंदूवादी संघटनों को और
कारसेवको को ही दोषी ठहरा दिया जाये |
सोचिये जो बोगी ढाई सालो तक खुले आसमान के पड़ी रही उस
बोगी की जाँच करके बनर्जी आयोग ने कहा की ट्रेन अंदर से
जलाई गयी थी .. मतलब वो कहना चाह रहे थे
की सभी कारसेवको को सामूहिक आत्मदाह करने
की इच्छा हो गयी इसलिए उन्होंने खुद ही ट्रेन में आग
लगा ली और किसी ने भी बाहर निकलने की कोशिस नही की |
मजे की बात देखिये की जस्टिस बनर्जी ने जनवरी २००५
को यानी बिहार चुनाव घोषित होने के ठीक दो दिन पहले
अपना विवादास्पद रिपोर्ट सार्वजनिक किये ताकि इस रिपोर्ट के
आधार पर लालूप्रसाद यादव बिहार के मुसलमानों को भड़काकर
उनका वोट हासिल कर सके |
लेकिन गोधरा ट्रेन हादसे में जख्मी हुए नीलकंठ तुलसीदास
भाटिया नामक एक शक्स ने बनर्जी आयोग के झूठे रिपोर्ट
को गुजरात हाईकोर्ट में चेलेंज किया | गुजरात हाईकोर्ट ने विश्व
के जानेमाने फायर विशेषज्ञ और फोरेंसिक एक्पर्ट का एक
पैनेल बनाया . और जस्टिस उमेश चन्द्र बनर्जी को इस पैनेल
के सामने पेश होने का सम्मन दिया ... तीन सम्मनो के बाद पेश
हुए बनर्जी साहब ने ये नही बता पाया की आखिर उन्होंने ये कैसे
निष्कर्ष निकला की ट्रेन में आग भीतर से लगी है .. जबकि आग
के पैटर्न और सभी गवाहों और खुद अभियुक्तों के बयानों पे
अनुसार आग बाहर से लगाई गयी थी और दरवाजो को बाहर से
बंद कर दिया गया था ..जस्टिस बनर्जी कोई जबाब नही दिए
और कोर्ट में कहा की वो एक आयोग के मुखिया होने के नाते
किसी भी सवाल का जबाब देने के लिए बाध्य नही है .. मेरा काम
था रेलवे को रिपोर्ट देना इसे सही या गलत मानना तो रेलवे
का काम है |
यानी ये पूरी तरह साबित हो गया था की लालूप्रसाद यादव में
जस्टिस उमेशचन्द्र बनर्जी आयोग का गठन सिर्फ अपने
राजनीतक रोटिया सेकने के लिए ही किया था | इस आयोग
को लालू ने पहले ही बता दिया था की मुझे किस तरह की जाँच
रिपोर्ट चाहिए |
फिर ओक्टूबर २००६ के गुजरात हाईकोर्ट की चार जजों की बेंच
ने जिसमे सभी जज एक राय पर सहमत थे उन्होंने लालू के
बनर्जी आयोग की रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया और
टिप्पड़ी करते हुए कहा की कोई रिटायर जज किसी नेता के हाथ
की कटपुतली न बने ..गुजरात हाईकोर्ट ने बनर्जी रिपोर्ट
को रद्दी, बकवास कहा .. अपनी टिप्पड़ी में गुजरात हाईकोर्ट ने
कहा
लेकिन ताज्ज्जुब हैकी मीडिया और दोगले सेकुलर लोग सिर्फ
एक तरफी बाते ही चलाते है
मित्रो अब आपने अपना बहुमुल्य वक्त देकर इस पोस्ट
को पढा इस के लिए हम आप के अभारी रहेगे
बस 5सैकण्ड का वक्त और दे इसे शेयर करे
ये मत सोचना कि आप फेस्बुक मुस्लिम मित्र
कया सोचेगा क्योकि ये सच है और सच को शेयर करे सबके
सामने लाय