Saturday, March 29, 2014

अधुनिक विमान का आविष्कार सर्व प्रथम भारत में ही हुआ था और इसके आविष्कारक थे शिवकर बापूजी तलपदे !!!

अधुनिक विमान का आविष्कार सर्व प्रथम भारत में ही हुआ था और इसके आविष्कारक थे शिवकर बापूजी तलपदे !!!

अगर आज किसीको पूछा जाये के सबसे पहला हवाई जाहाज किसने बनाया? तोह ले देके एक नाम लेते है Write Brothers नव बनाया और उनके नाम से दर्ज है यह अविष्कार| हम बचपन से यह पड़ते आये है के 17 दिसंबर सन 1903 को अमेरिका के कैरोलिना के समुद्रतट पर Write Brothers ने पहला हवाई जाहाज बना कर उड़ाया जो 120 फिट उड़ा और गिर गया| और उसके बाद फिर आगे हवाई जाहाज की कहानी शुरू होती है|

पर अभी दस्ताबेज मिले है और वो यह बताते है के 1903 से कई साल पहले सन 1895 मे हमारे देश के एक बहुत बड़े विमान वैज्ञानिक ने हवाई जाहाज बनाया और मुंबई के चौपाटी की समुद्रतट पर उड़ाया और वो 1500 फिट ऊपर उड़ा और उसके बाद निचे गिर गया|

जिस भारतीय वैगानिक ने यह करामात की उनका नाम था “शिवकर बापूजी तलपडे” वे मराठी व्यक्ति थे| मुंबई मे एक छोटा सा इलाका है जिसको चिर बाज़ार कहते है, उहाँ उनका जन्म हुआ और पड़ाई लिखाई की एक गुरु के सान्निध्य मे रहके संस्कृत साहित्य का अध्यन किया| अध्यन करते समय उनकी विमान शास्त्र मे रूचि पैदा हो गयी| और हमारे देश मे विमान शास्त्र के जो सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते है वो “महर्षि भ्वरद्वाज” | महर्षि भ्वरद्वाज ने विमान शास्त्र की सबसे पहली पुस्तक लिखी, उस पुस्तक के आधार पर फिर सेकड़ो पुस्तकें लिखी गयी| भारत मे जो पुस्तक उपलभ्द है उसमे सबसे पुराणी purपुस्तक 1500 साल puraपुराणी niहै और महर्षि भ्वरद्वाज तो उसके भी बहुत साल पहले हुए|

शिवकर बापूजी तलपडे जी के हात मे महर्षि भ्वरद्वाज के विमान शास्त्र पुस्तक लग गयी और इस पुस्तक को आद्योपांत उन्होंने पड़ा| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी ने कुछ रोचक बातें कहीं है जैसे –
> “इस पुस्तक के आठ अध्याय मे विमान बनाने की तकनिकी का हि वर्णन है”
> “आठ अध्याय मे 100 खंड है जिसमे विमान बनाने की टेक्नोलॉजी का वर्णन है”
> “महर्षि भरद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक मे विमान बनाने के 500 सिद्धांत लिखे है”

एक सिद्धांत (Principle) होता है जिसमे इंजन बन जाता है और पूरा विमान बन जाता है, ऐसे 500 सिद्धांत लिखे है महर्षि भरद्वाज के अनुसार 500 तरह के विमान बनाये जा सकते है हर एक सिद्धांत पर|

इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी और लिखते है के –
> “इन 500 सिद्धांतो के 3000 श्लोक है विमान शास्त्र मे”

यह तो (Technology) तकनिकी होती है इसका एक (Process) प्रक्रिया होती है, और हर एक तकनिकी के एक विशेष प्रक्रिया होती है तोह महर्षि भ्वरद्वाज ने 32 प्रक्रियाओं का वर्णन किया है| माने 32 तरह से 500 किसम के विमान बनाए जा सकते है मतलब 32 तरीके है 500 तरह के विमान बनाने के; मने एक विमान बनाने के 32 तरीके, 2 विमान बनाने के 32 तरीके; 500 विमान बनाने के 32 तरीके उस पुस्तक ‘विमान शास्त्र’ मे है| 3000 श्लोक है 100 खंड है और 8 अध्याय है| आप सोचिये यह किनता बड़ा ग्रन्थ है!

इस ग्रन्थ को शिवकर बापूजी तलपडे जी ने पड़ा अपनी विद्यार्थी जीवन से, और पड़ पड़ कर परिक्षण किये, और परिक्षण करते करते 1895 मे वो सफल हो गए और उन्होंने पहला विमान बना लिया और उसको उड़ा कर भी दिखाया| इस परिक्षण को देखने के लिए भारत के बड़े बड़े लोग गए| हमारे देश के उस समय के एक बड़े व्यक्ति हुआ करते थे ‘महादेव गोविन्द रानाडे’ जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था मे जज की हैसियत से काम किया करते थे मुम्बई हाई कोर्ट मे, तो रानाडे जी गए उसको देखने के लिए| बड़ोदरा के एक बड़े रजा हुअ करते थे ‘गायकोवाड’ नाम के तो वो गए उसको देखने के लिए| ऐसे बहुत से लोगों के सामने और हजारो साधारण लोगोंकी उपस्थिति मे शिवकर बापूजी तलपडे ने अपना विमान उड़ाया| और हयरानी की बात यह थी उस विमान को उन्होंने उड़ाया उसमे खुद नही बैठे, बिना चालक के उड़ा दिया उसको| मने उस विमान को उड़ाया होगा पर कण्ट्रोल सिस्टम तलपडे जी के हात मे है और विमान हवा मे उड़ रहा है और यह घटना 1895 मे हुआ| और उस विमान को उड़ाते उड़ाते 1500 फिट तक वो लेके गए फिर उसके बाद उन्होंने उसको उतारा, और बहुत स्वकुशल उतारकर विमान को जमीन पर खड़ा कर दिया| माने वो विमान टुटा नही, उसमे आग लगी नही उसके साथ कोई दुर्घटना हुई नही, वो उड़ा 1500 फिट तक गया फिर निचे कुशलता से उतरा और सारी भीड़ ने तलपडे जी को कंधे पर उठा लिया| महाराजा गायकोवाड जी ने उनके लिए इनाम की घोषणा की, एक जागीर उनके लिए घोषणा कर दी और गोविन्द रानाडे जी जो थे उहाँ पर उन्होंने घोषणा की, बड़े बड़े लोगों ने घोषनाये की|
तलपडे जी का यह कहना था की मैं ऐसे कई विमान बना सकता हूँ, मुझे पैसे की कुछ जरुरत है, आर्थिक रूप से मेरी अछि स्थिति नही है| तो लोगोने इतना पैसा इकठ्ठा करने की घोषनाये की के आगे उनको कोई जरुरत नही थी लेकिन तभी उनके साथ एक धोका हुआ| अंग्रेजो की एक कंपनी थी उसका नाम था ‘Ralli Brothers’ वो आयी तलपडे जी के पास और तलपडे जी को कहा यह जो विमान आपने बनाया है इसका ड्रइंग हमें दे दीजिये| तलपडे जी ने कहा की उसका कारण बताइए, तो उन्होंने कहा की हम आपकी मदत करना चाहते है, आपने यह जो अविष्कार किया है इसको सारी दुनिया के सामने लाना चाहते है, आपके पास पैसे की बहुत कमी है, हमारी कंपनी काफी पैसा इस काम मे लगा सकती है, लिहाजा हमारे साथ आप समझोता कर लीजिये, और इस विमान की डिजाईन दे दीजिये| तलपडे जी भोले भाले सीधे साधे आदमी थे तो वो मन गए और कंपनी के साथ उन्होंने एक समझोता कर लिया| उस समझोते मे Ralli Brothers जो कंपनी थी उसने विमान का जो मोडेल था उनसे ले लिया, ड्रइंग ले ली और डिजाईन ले ली; और उसको ले कर यह कंपनी लन्दन चली गयी और लन्दन जाने के बाद उस समझोते को वो कंपनी भूल गयी| और वोही ड्रइंग और वो डिजाईन फिर अमेरिका पोहुंच गयी| फिर अमेरिका मे Write Brothers के हात मे आ गयी फिर Write Brothers ने वो विमान बनाके अपने नाम से सारी दुनिया मे रजिस्टर करा लिया|
तलपडे जी की गलती क्या थी के उनको चालाकी नही आती थी, ज्ञान तो बहुत था उनके पास| राजीव भाई कहते है के भारत मे सबसे बड़ी समस्या 12-15 साल मे उनको जो समझ मे आयी है के “हमको सब ज्ञान आती है, सब तकनिकी आती है, सब आती है पर चालाकी नही आती; एक गाना है ‘सबकुछ सीखा हमने न सीखी होसियारी’ यह भारतवासी पर बिलकुल फिट है, और यह अंग्रेजो को अमेरिकिओंको कुछ नही आता सिर्फ चालाकी आती है| उनके पास न ज्ञान है न उनके पास कोई आधार है उनको एक हि चीज आती है चालाकी और चालाकी मे वो नंबर 1 है| किसीका दुनिया मे कुछ भी नया मिले वो चालाकी करके अपने पास ले लो और अपने नाम से उसको प्रकाशित कर दो|”
शिवकर बापूजी तलपडे जी के द्वारा 1895 मे बनाया हुअ विमान सारी दुनिया के सामने अब यह घोषित करता है के विमान सबसे पहले अमेरिकी Write Brothers ने बनाया और 1903 मे 17 दिसम्बर को उड़ाया पर इससे 8 साल पहले भारत मे विमान बन जुका था और देश के सामने वो दिखाया जा जुका था|

अब हमें इस बात के लिए लड़ाई करनी है अमेरिकिओं से और यूरोपियन लोगों से के यह तो हमारे नाम हि दर्ज होना चाहिए और Ralli Brothers कंपनी ने जो बैमानी और बदमासी की थी समझोते के बाद उसका उस कंपनी को हरजाना देना चाहिए क्योकि समझोता करने के बाद बैमानी की थी उन्होंने|

राजीव भाई आगे कहते है Ralli Brothers कंपनी से धोका खाने के कुछ दिन बाद तलपडे जी की मृत्यु हो गयी और उनकी मृत्यु के बाद सारी कहानी ख़तम हो गयी| उनकी तो मृत्यु के बारे मे भी शंका है के उनकी हत्या की गयी और दर्ज कर दिया गया के उनकी मृत्यु हो गयी; और ऐसे व्यक्ति की हत्या करना बहुत स्वभाबिक है के जिसका नाम दुनिया मे इतना बड़ा अविष्कार होने की संभावना हो| तो अगर हम फिर उस पुराने दस्ताबेज खोले ढूंढें उस फाइल को, फिर से देखें तो पता चल जायेगा और दूध का दूध और पानी का पनी सारा सच दुनिया के सामने आ जायेगा|

आपने पूरी पोस्ट पड़ी इसलिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद्
वन्देमातरम
भारत माता की जय

श्रोत- प्राचीन महान सनातन धर्म और भारत

Friday, March 28, 2014

भारतीय सशस्‍त्र सेनाएँ

भारत सरकार भारत की तथा इसके प्रत्‍येक भाग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है। भारतीय शस्‍त्र सेनाओं की सर्वोच्‍च कमान भारत के राष्‍ट्रपति के पास है। राष्‍ट्र की रक्षा का दायित्‍व मंत्री मंडल के पास होता है। इसके निर्वहन रक्षा मंत्रालय से किया जाता है, जो सशस्‍त्र बलों को देश की रक्षा के संदर्भ में उनके दायित्‍व के निर्वहन के लिए नीतिगत रूपरेखा और जानकारियां प्रदान करता है। भारतीय शस्‍त्र सेना में तीन प्रभाग हैं भारतीय थलसेनाभारतीय जलसेना,भारतीय वायुसेना, और अन्य कई स्वतंत्र और आनुषांगिक इकाइयाँ जैसे: भारतीय सीमा सुरक्षा बलअसम राइफल्सराष्ट्रीय राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड,भारत तिब्बत सीमा पुलिस इत्यादि।
भारतीय सेना के सरवप्रमुख कमांडर भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी हैं। यह दुनिया के सबसे बड़ी और प्रमुख सेनाओं में से एक है। सँख्या की दृष्टि सेभारतीय थलसेना के जवानों की सँख्या दुनिया में चीन के बाद सबसे अधिक है। जबसे भारतीय सेना का गठन हुआ है भारत ने दोनों विश्वयुद्ध में भाग लिया है।भारत की आजादी के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ तीन युद्ध जीते हैं (1948, 1965, and 1971) तथा चीन से 1962 में एक बार मुँह की खायी है। 1999 में इसके अलावा एक छोटा युद्ध कारगिल युद्ध पाकिस्तान के साथ दुबारा लड़ा गया जिसके बाद पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ का तख्ता पलट कर परवेज़ मुशर्रफ सत्तासीन हुये।
भारतीय सेना आण्विक हथियार से लैस है और उनके पास उचित मिसाइल तकनीक भी उपलब्ध है।
भारतीय सेना की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र है।

Thursday, March 27, 2014

5000 साल पहले का "विमान"

ओसामा बिन लादेन नामक इस्लामी आतंकवादी को खोजते हुए अमेरिका के सैनिकों को अफगानिस्तान (कंधार) की एक गुफा में 5000 साल पहले का "विमान" मिला था, जिसे महाभारत काल का बताया जा रहा है ।
सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि Russian Foreign Intelligence ने साफ़ साफ़ बताया है कि ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है और जब इसका इंजन शुरू होता है तो बड़ी मात्रा में प्रकाश का उत्सर्जन होता है ।

हालाँकि इस न्यूज़ को भारत के बिकाऊ मिडिया ने महत्व नहीं दिया क्यों कि उनकी नजर में भारत के हम हिंदूओ की महिमा बढ़ाने वाली ये खबर सांप्रदायिक है ।

ज्ञातव्य है कि Russian Foreign Intelligence Service (SVR) report द्वारा 21 December 2010 को एक रिपोर्ट पेश की गयी जिसमे बताया गया है कि ये विमान द्वारा उत्पन्न एक रहस्यमयी Time Well क्षेत्र है और जिसकी खतरनाक electromagnetic shockwave से ये अमेरिका के सील कमांडो मारे गये या गायब हो गये तथा इसी की वजह से कोई गुफा में नहीं जा पा रहा था ।

शायद आप लोगों को याद होगा कि महाराज धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी एवं मामा शकुनि गंधार के ही थे ।
महाभारत में इस विमान का वर्णन करते हुए कहा गया है कि -
हम एक विमान जिसमे कि चार मजबूत पहिये लगे हुए हैं एवं परिधि में बारह हाथ के हैं इसके अलावा 'प्रज्वलन प्रक्षेपत्रों ' से सुसज्जित है परिपत्र 'परावर्तक' के माध्यम से संचालित होता है और उसके अन्य घातक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं ।

जब उसे किसी भी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर प्रक्षेपित किया जाता है तो तुरंत वह 'अपनी शक्ति के साथ यह भस्म' कर देता है और जो जाते समय जो एक 'प्रकाश की शाफ्ट' का उत्पादन किया ।

( जाहिर सी बात है कि महाभारत में विमान एवं मिसाइल की बात की जा रही है )
हमारे महाभारत के इसी बात को US Military के scientists सत्यापित करते हुए यह बताते हैं किये विमान 5000 हज़ार पुराना (महाभारत कालीन) है और जब कमांडो इसे निकालने का प्रयास कर रहे थे तो ये सक्रिय हो गया जिससे इसके चारों और Time Well क्षेत्र उत्पन्न हो गया और यही क्षेत्र विमान को पकडे हुए है इसीलिए इस Time Well क्षेत्र के सक्रिय होने के बाद 8 सील कमांडो गायब हो गए ।

जानकारी के लिए बता दूँ कि Time Well क्षेत्र विद्युत चुम्बकीये क्षेत्र होता है जो हमारे आकाश गंगा की तरह सर्पिलाकार होता है ।

वहीं एक कदम आगे बढ़ कर Russian Foreign Intelligence ने तो साफ़ साफ़ बताया कि ये वही विमान है जो संस्कृत रचित महाभारत में वर्णित है।

सिर्फ इतना ही नहीं SVR report का कहना है कि यह क्षेत्र 5 August को फिर सक्रिय हुआ था जिससे एक बार फिर electromagnetic shockwave नामक खतरनाक किरणें उत्पन्न हुई और ये इतनी खतरनाक थी कि इससे 40 सिपाही तथा trained German Shepherd dogs भी इसकी चपेट में आ गए।

ये प्रत्यक्ष प्रमाण है हमारे हिन्दू सनातन धर्म के उत्कृष्ट विज्ञान का और साफ साफ तमाचा है उन सेकुलरों और मुस्लिमों के मुंह पर जो हमारे हिन्दू सनातन धर्म पर ऊंगली उठाते हैं और जिन्हें महाभारत एक काल्पनिक कथा मात्र लगती है ।

Wednesday, March 26, 2014

वेद और वैदिक आर्य ग्रन्थों में गुरूत्वाकर्षण के नियम ( Law Of Gravitation from ancient India )

वेद और वैदिक आर्य ग्रन्थों में गुरूत्वाकर्षण के नियम ( Law Of Gravitation from ancient India )

वेद और वैदिक आर्ष ग्रन्थों में गुरूत्वाकर्षण के नियम को समझाने के लिये पर्याप्त सूत्र हैं । परन्तु जिनको न जानकर हमारे आजकल के युवा वर्ग केवल पाश्चात्य वैज्ञानिकों के पीछे ही श्रद्धाभाव रखते हैं । जबकि यह करोड़ों वर्ष पहले वेदों में सूक्ष्म ज्ञान के रूप में ईश्वर ने हमारे लिये पहले ही वर्णन कर दिया है । तो ऐसे मूर्ख लोग जिसको Newton's Law Of Gravitation कहते फिरते हैं । वह वास्तव में Nature's Law Of Gravitation होना चाहिये । तो लीजिये हम अनेकों प्रमाण देते हैं कि हमारे ऋषियों ने जो बात पहले ही वेदों से अपनी तपश्चर्या से जान ली थी उसके सामने ये Newton महाराज कितना ठहरते हैं ।

आधारशक्ति :- बृहत् जाबाल उपनिषद् में गुरूत्वाकर्षण सिद्धान्त को आधारशक्ति नाम से कहा गया है ।
इसके दो भाग किये गये हैं :-
(१) ऊर्ध्वशक्ति या ऊर्ध्वग :- ऊपर की ओर खिंचकर जाना । जैसे अग्नि का ऊपर की ओर जाना ।
(२) अधःशक्ति या निम्नग :- नीचे की ओर खिंचकर जाना । जैसे जल का नीचे की ओर जाना या पत्थर आदि का नीचे आना ।

आर्ष ग्रन्थों से प्रमाण देते हैं :-
(१) यह बृहत् उपनिषद् के सूत्र हैं :-
अग्नीषोमात्मकं जगत् ।( बृ० उप० २.४ )
आधारशक्त्यावधृतः कालाग्निरयम् ऊर्ध्वगः । तथैव निम्नगः सोमः । ( बृ० उप० २.८ )
अर्थात :- सारा संसार अग्नि और सोम का समन्वय है । अग्नि की ऊर्ध्वगति है और सोम की अधोःशक्ति । इन दोनो शक्तियों के आकर्षण से ही संसार रुका हुआ है ।

(२) १५० ई० पूर्व महर्षि पतञ्जली ने व्याकरण महाभाष्य में भी गुरूत्वाकर्षण के सिद्धान्त का उल्लेख करते हुए लिखा :-
लोष्ठः क्षिप्तो बाहुवेगं गत्वा नैव तिर्यक् गच्छति नोर्ध्वमारोहति ।
पृथिवीविकारः पृथिवीमेव गच्छति आन्तर्यतः । ( महाभाष्य :- स्थानेन्तरतमः, १/१/४९ सूत्र पर )
अर्थात् :- पृथिवी की आकर्षण शक्ति इस प्रकार की है कि यदि मिट्टी का ढेला ऊपर फेंका जाता है तो वह बहुवेग को पूरा करने पर, न टेढ़ा जाता है और न ऊपर चढ़ता है । वह पृथिवी का विकार है, इसलिये पृथिवी पर ही आ जाता है ।

(३) भास्कराचार्य द्वितीय पूर्व ने अपने सिद्धान्तशिरोमणि में यह कहा :-
आकृष्टिशक्तिश्चमहि तया यत्
खस्थं गुरूं स्वाभिमुखं स्वशक्त्या ।
आकृष्यते तत् पततीव भाति
समे समन्तात् क्व पतत्वियं खे ।। ( सिद्धान्त० भुवन० १६ )
अर्थात :- पृथिवी में आकर्षण शक्ति है जिसके कारण वह ऊपर की भारी वस्तु को अपनी ओर खींच लेती है । वह वस्तु पृथिवी पर गिरती हुई सी लगती है । पृथिवी स्वयं सूर्य आदि के आकर्षण से रुकी हुई है,अतः वह निराधार आकाश में स्थित है तथा अपने स्थान से हटती नहीं है और न गिरती है । वह अपनी कील पर घूमती है।

(४) वराहमिहिर ने अपने ग्रन्थ पञ्चसिद्धान्तिका में कहा :-
पंचभमहाभूतमयस्तारा गण पंजरे महीगोलः ।
खेयस्कान्तान्तःस्थो लोह इवावस्थितो वृत्तः ।। ( पंच०पृ०३१ )
अर्थात :- तारासमूहरूपी पंजर में गोल पृथिवी इसी प्रकार रुकी हुई है जैसे दो बड़े चुम्बकों के बीच में लोहा ।

(५) आचार्य श्रीपति ने अपने ग्रन्थ सिद्धान्तशेखर में कहा है :-
उष्णत्वमर्कशिखिनोः शिशिरत्वमिन्दौ,.. निर्हतुरेवमवनेःस्थितिरन्तरिक्षे ।। ( सिद्धान्त० १५/२१ )
नभस्ययस्कान्तमहामणीनां मध्ये स्थितो लोहगुणो यथास्ते ।
आधारशून्यो पि तथैव सर्वधारो धरित्र्या ध्रुवमेव गोलः ।। ( सिद्धान्त० १५/२२ )
अर्थात :- पृथिवी की अन्तरिक्ष में स्थिति उसी प्रकार स्वाभाविक है, जैसे सूर्य्य में गर्मी, चन्द्र में शीतलता और वायु में गतिशीलता । दो बड़े चुम्बकों के बीच में लोहे का गोला स्थिर रहता है, उसी प्रकार पृथिवी भी अपनी धुरी पर रुकी हुई है ।

(६) ऋषि पिप्पलाद ( लगभग ६००० वर्ष पूर्व ) ने प्रश्न उपनिषद् में कहा :-
पायूपस्थे - अपानम् । ( प्रश्न उप० ३.४ )
पृथिव्यां या देवता सैषा पुरुषस्यापानमवष्टभ्य० । ( प्रश्न उप० ३.८ )
तथा पृथिव्याम् अभिमानिनी या देवता ... सैषा पुरुषस्य अपानवृत्तिम् आकृष्य.... अपकर्षेन अनुग्रहं कुर्वती वर्तते । अन्यथा हि शरीरं गुरुत्वात् पतेत् सावकाशे वा उद्गच्छेत् । ( शांकर भाष्य, प्रश्न० ३.८ )
अर्थात :- अपान वायु के द्वारा ही मल मूत्र नीचे आता है । पृथिवी अपने आकर्षण शक्ति के द्वारा ही मनुष्य को रोके हुए है, अन्यथा वह आकाश में उड़ जाता ।

(७) यह ऋग्वेद के मन्त्र हैं :-
यदा ते हर्य्यता हरी वावृधाते दिवेदिवे ।
आदित्ते विश्वा भुवनानि येमिरे ।। ( ऋ० अ० ६/ अ० १ / व० ६ / म० ३ )
अर्थात :- सब लोकों का सूर्य्य के साथ आकर्षण और सूर्य्य आदि लोकों का परमेश्वर के साथ आकर्षण है । इन्द्र जो वायु , इसमें ईश्वर के रचे आकर्षण, प्रकाश और बल आदि बड़े गुण हैं । उनसे सब लोकों का दिन दिन और क्षण क्षण के प्रति धारण, आकर्षण और प्रकाश होता है । इस हेतु से सब लोक अपनी अपनी कक्षा में चलते रहते हैं, इधर उधर विचल भी नहीं सकते ।
यदा सूर्य्यममुं दिवि शुक्रं ज्योतिरधारयः ।
आदित्ते विश्वा भुवनानी येमिरे ।।३।। ( ऋ० अ० ६/ अ० १ / व० ६ / म० ५ )
अर्थात :- हे परमेश्वर ! जब उन सूर्य्यादि लोकों को आपने रचा और आपके ही प्रकाश से प्रकाशित हो रहे हैं और आप अपने सामर्थ्य से उनका धारण कर रहे हैं , इसी कारण सूर्य्य और पृथिवी आदि लोकों और अपने स्वरूप को धारण कर रहे हैं । इन सूर्य्य आदि लोकों का सब लोकों के साथ आकर्षण से धारण होता है । इससे यह सिद्ध हुआ कि परमेश्वर सब लोकों का आकर्षण और धारण कर रहा है

Taj Mahal

जिसने ताजमहल बनवाया:

वह था मुगल बादशाह शाहजहाँ. चंगेजखान का वंशज बाबर भारत का पहला मुगल बादशाह था, उसके द्वारा 1526 में इब्राहिम लोदी को पानीपत में पराजित कर दिल्ली पर कब्ज़ा जमाने के बाद उसके वंशजो ने 300 वर्षो तक भारत पर शासन किया. ज्यादातर मुगल शासक क्रूर, जनूनी और सत्ता-लोभी थे. बाबर पराजित सैनिकों के सर कलम कर खोपड़ीयों की मिनारे बनाया करता था. उसके वंशज भी उसके बाद सत्ता और सम्पत्ति में वृद्धि करते रहे. बाबर के बाद हूमायु और फिर अकबर तथा बाद में जहाँगीर ने इतनी सम्पत्ति इकट्ठी कि की उसका मूल्यांकन ही असंभव हो गया. कहते है एक बार जहाँगीर ने इसकी कोशिश की मगर वह चार महीने तक मूल्यांकन का कार्य चला कर अंत में थक-हार कर इसे बंद करवा दिया.

जहाँ बेशुमार सत्ता और सम्पत्ति हो वहाँ इसके लिए षडयंत्र और गंदे दाव-पैच न हो ऐसा नहीं हो सकता. जहाँगीर के जीवित रहते ही उसका महत्त्वाकांक्षी पुत्र खुर्रम सत्ता के लिए अपने भाइयों का सफ़ाया करने में लग गया था. एक भाई को खुद फाँसी पर लटका दिया, एक को कैद कर आंखे फुडवा दी और एक को उसी के सैनिकों द्वारा कत्ल करवा दिया और अंत में ई.स. 1628 में मुगल शहनशाह बना तथा अपना नाम खुर्रम से शाहजहाँ रख लिया. नाम के साथ कर्म नहीं बदले. एक बार उसने पराजित 8000 सैनिकों के सर-कलम कर उससे 260 मिनारें बनवायी. वैसे तो क्रूरता और कला का कोई मेल नहीं है मगर यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं की इसी शहनशाह ने सगंमरमर की सबसे खुबसुरत इमारत का निर्माण भी करवाया.

ई.स. 1631 में शाहजहाँ की बेगम मुमताज की मृत्यु होने पर उसकी याद में शहनशाह ने एक भव्य मकबरा बनाने का निर्णय लिया वह भी महल-नुमा मकबरा.

संसाधन:

बादशाह एक शानदार भवन का निर्माण करवाना चाहता था और इसके लिए खज़ाने के दरवाज़े खोल दिये थे. धन पानी की तरह बहाने को तैयार था. उसके हिसाब-किताब रखने वाले रूद्रदास ने अनुमान लगाया था के कुल खर्च 96 लाख के आस-पास होगा, जो आज के हिसाब से देखें तो इसका 200 गुना ज्यादा बैठता है.

20000 मज़दूर एकत्र किये गये. इनमें 37 ऐसे कारीगर थे जो अपने अपने काम में दक्ष थे और इन्ही की देख रेख में ताजमहल का निर्माण कार्य सम्पन्न होना था.

बगदाद से एक कारीगर बुलवाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था. मध्य एशिया के बुखारा शहर से जिस कारीगर को बुलवाया गया वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में दक्ष था. विराट कद के गुम्बदो का निर्माण करने में दक्ष कारीगर तब तुर्की के शहर इस्तम्बुल में रहा करता था, उसे भी बुलवाया गया. मिनारों के निर्माण कार्य के लिए समरकंद से कारीगर को बुलवाया गया. वहीं मुख्य शिल्पी कंधार का था. इस प्रकार छह महिनो में 37 दक्ष कारीगर इक्कठे किये गये जिनकी देखरेख में बीस हजार मज़दूर अगले बीस-बाईस साल तक निर्माण कार्य करने वाले थे.

निर्माण कार्य के लिए संगमरमर राजस्थान के मकराणा से आने वाला था, तो अन्य चालीस प्रकार के कीमती पत्थर व रत्न बगदाद, अफ़गानिस्तान, तिब्बत, इजिप्त, रूस, ईरान जैसे देशों की खाक छान कर व भारी किमत चुका कर इक्कठा किये गये.

निर्माण कार्य में आयी समस्याएं व उनके समाधान :

भारी भरकम टनो के हिसाब से संगमरमर पत्थर मकराणा से आगरा तक लाना एक समस्या थी. दोनो स्थानों के बीच की दूरी 300 किमी जितनी है. ऐसे में सबसे पहले तो पत्थर की खदानों में बादशाह ने 1800 जितने मज़दूर काम पर लगाए, यहाँ सवा दो-दो टन जितने भारी पत्थर के चौकोर टुकड़े काटे गये. रेगिस्तान की वजह से पहियों वाले वाहन काम आने वाले थे नहीं और ऊँट इतने भारी पत्थर उठा नहीं सकते थे, ऐसे में इस काम के लिए 1000 हाथियों तथा महावत व अन्य देखभाल के लिए 2500 लोगो को काम पर लगाया गया. हाथी रोज 30 किमी के हिसाब से दूरी तय करते और दस दिनो में मकराणा से पत्थर लिये आगरा पहुँचते.

दूसरी समस्या थी नरम मिट्टी. निर्माण कार्य के लिए आगरा में यमुना का किनारा चुना गया, जहाँ की मिट्टी नरम है तथा इतनी भारी भरकम इमारत का बोझ सह सके वैसी नहीं थी. एक समय ऐसा आता जब इमारत अपने ही भार से ज़मीन में धंसने लगती. इसका हल निकालते हुए असंख्य सिक्को को खड़े में ज़मीन में दबाव से गाड़े गये. इससे पानी निचुड़ कर निकल गया तथा मिट्टी में कसाव आया भी आया.

इमारत की नींव 15 मीटर तक की रखी गई तथा इमारत के वजन को बड़े हिस्से में बाँट देने के इरादे से 95 मीटर लम्बे-जोड़े व 6.7 मीटर ऊँचे चबुतरे को बनाया गया. इस चबुतरे के बीचोंबीच एक मीटर चौड़ी दीवार वाली इमारत बननी थी जिसकी ऊँचाई 67 मीटर तक हो जानी थी. साथ ही चबुतरे के चारों कोनो पर डेढ मीटर के व्यास वाली तथा 40 मीटर से ऊँची मीनारें बननी थी. इनका निर्माण कार्य जब आगे बड़ा तब तीसरी समस्या सामने आयी, इतनी ऊँचाई तक पत्थरों को कैसे पहुँचाए जाये. बाँस के मचान अनौपयोगी थे. आधुनिक मशीनें तो तब थी नहीं. तो इसका हल निकाला गया ईंट व लकड़ी से ऊँचाई की ओर जाते मार्ग बनाये गये. 15 मीटर पर एक फूट जितनी ऊँचाई प्राप्त करे ऐसे इन "फ्लाइओवर पूल नुमा" मार्ग पर बैलगाड़ी जैसे साधन चल सकते थे. जैसे जैसे ऊँचाई बढ़ती इन मार्गो को भी अद्यतित करना पड़ता. अंततः इन मार्गो की लम्बाई चार किलोमीटर तक बड़ गई थी.

इन्ही मार्गो से लगभग 500 पशु रात-दिन 84600 घनमिटर जितना पत्थर ढ़ोया करते थे.

ताज हुआ तैयार :

कुशल कारीगरो द्वारा अद्भुत कारीगरी का नमूना स्वरूप ताजमहल ई.स.1654 में लगभग 22 वर्षो में बन कर तैयार हुआ. मगर तब तक शाहजहाँ ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली (शाहजहानाबाद) स्थानांतरित कर ली थी. ताज के सौंदर्य से वशीभूत शाहजहाँ ने सफेद ताजमहल के सामने के किनारे ऐसा ही काला महल बनाने की इच्छा व्यक्त की.

अधूरी रही इच्छा:

ताज पर हुए बे हिसाब खर्च से शाहजहाँ का पुत्र औरंगज़ेब नाराज़ था, एक और महल के निर्माण का सुन उसने षडयंत्र रचने शुरू किये. पिता की भाँती ही उसने भी अपने भाइयों को रास्ते से हटाया और पिता को पद भ्रष्ट कर कैदी के रूप में आगरा भेज दिया. शाहजहाँ आगरा के क़िले से ताज को निहारा करता. ऐसे ही एक दिन पहरेदारों ने पद भ्रष्ट बादशाह को ताजमहल को निहारते हुए मृत अवस्था में पाया.



महाराजा जयसिंह

इंगलैण्ड की राजधानी लंदन में यात्रा के दौरान
एक शाम महाराजा जयसिंह सादे कपड़ों में बॉन्ड
स्ट्रीट में घूमने के लिए निकले और वहां उन्होने
रोल्स रॉयस कम्पनी का भव्य शो रूम देखा और
मोटर कार का भाव जानने के लिए अंदर चले गए।
शॉ रूम के अंग्रेज मैनेजर ने उन्हें “कंगाल भारत”
का सामान्य नागरिक समझ कर वापस भेज
दिया। शोरूम के सेल्समैन ने भी उन्हें बहुत
अपमानित किया, बस उन्हें “गेट आऊट” कहने के
अलावा अपमान करने में कोई कोर कसर
नहीं छोड़ी।अपमानित महाराजा जयसिंह वापस
होटल पर आए और रोल्स रॉयस के उसी शोरूम पर
फोन लगवाया और संदेशा कहलवाया कि अलवर
के महाराजा कुछ मोटर कार खरीदने चाहते हैं।
कुछ देर बाद जब महाराजा रजवाड़ी पोशाक में
और अपने पूरे दबदबे के साथ शोरूम पर पहुंचे तब तक
शोरूम में उनके स्वागत में “रेड कार्पेट” बिछ
चुका था। वही अंग्रेज मैनेजर और सेल्समेन्स उनके
सामने नतमस्तक खड़े थे। महाराजा ने उस समय
शोरूम में पड़ी सभी छ: कारों को खरीदकर,
कारों की कीमत के साथ उन्हें भारत पहुँचाने के
खर्च का भुगतान कर दिया।
भारत पहुँच कर महाराजा जयसिंह ने सभी छ:
कारों को अलवर नगरपालिका को दे दी और
आदेश दिया कि हर कार का उपयोग (उस समय के
दौरान 8320 वर्ग कि.मी) अलवर राज्य में
कचरा उठाने के लिए किया जाए।
विश्व की अव्वल नंबर मानी जाने वाली सुपर
क्लास रोल्स रॉयस कार नगरपालिका के लिए
कचरागाड़ी के रूप में उपयोग लिए जाने के
समाचार पूरी दुनिया में फैल गया और रोल्स
रॉयस की इज्जत तार-तार हुई। युरोप-अमरीका में
कोई अमीर व्यक्ति अगर ये कहता “मेरे पास रोल्स
रॉयस कार” है तो सामने
वाला पूछता “कौनसी?” वही जो भारत में
कचरा उठाने के काम आती है! वही?
बदनामी के कारण और कारों की बिक्री में
एकदम कमी आने से रोल्स रॉयस कम्पनी के
मालिकों को बहुत नुकसान होने लगा। महाराज
जयसिंह को उन्होने क्षमा मांगते हुए टेलिग्राम
भेजे और अनुरोध किया कि रोल्स रॉयस कारों से
कचरा उठवाना बन्द करवावें। माफी पत्र लिखने
के साथ ही छ: और मोटर कार बिना मूल्य देने के
लिए भी तैयार हो गए।
महाराजा जयसिंह जी को जब पक्का विश्वास
हो गया कि अंग्रेजों को वाजिब बोधपाठ मिल
गया है तो महाराजा ने उन कारों से
कचरा उठवाना बन्द करवाया !

विशेष ⇨
भाईलोगो वो कार आज भी अलवर की
नगरपालिका में रखी हुई हैं।

Earn Money on Online

अगर आप Internet पर काफी Surfing करते हैं अथवा आपका अपना Blog या Website है, जिस पर आप अक्‍सर कुछ ना कुछ लिखते रहते हैं, तो आप Internet से कुछ पैसा भी कमा सकते हैं। Internet पर कुछ Side Income करने के लिए ये जरूरी नहीं है कि आपके पास अपना स्‍वयं का Blog या Website हो, लेकिन यदि आप Internet द्वारा कुछ Side Income करना चाहते हैं, तो कम से कम आपके पास अपना एक Blog जरूर होना चाहिए, क्‍योंकि जिस तरह से किसी भी काम को करने के लिए हमें किसी ना किसी माध्‍यम की जरूरत जरूर पडती है, ठीक उसी तरह से यदि हम Internet पर कुछ Side Income करना चाहें, तो हमारा Blog उस Internet Business के माध्‍यम के रूप में काम करता है। चलिए, पहले हम समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर Internet पर पैसा कैसे कमाया जा सकता है ?

ये बात तो हम सभी समझ ही हैं कि विभिन्न कम्पनियां ज्यादा से ज्यादा तरक्की करना चाहती हैं। लेकिन विभिन्न कम्पनियां केवल उसी स्थिति में ज्‍यादा से ज्‍यादा तरक्‍की कर सकती हैं, जब उनके द्वारा बनाया जाने वाला Product Market में ज्‍यादा से ज्‍यादा बिके और ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग किसी कम्‍पनी के Product को केवल उसी स्थिति में खरीद सकते हैं, जबकि उस कम्‍पनी के Products के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को जानकारी हो, क्‍योंकि जब तक लोग किसी चीज के बारे में जानेंगे नहीं तब तक वे उसे खरीद कैसे सकते हैं और जब तक लोग किसी चीज को खरीदेंगे नहीं, तब तक उस चीज को बनाने वाली कम्‍पनी तरक्‍की कैसे कर सकती है। इसलिए विभिन्‍न कम्‍पनियां अपने Products के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को बताने के लिए विभिन्‍न प्रकार के Advertisement करती है और अपने Products की Advertising करने के लिए वे ऐसे Distribution माध्‍यमों को चुनती हैं, जिन्‍हें ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग उपयोग में लेते हैं। वे अपने Product की Advetising करने के लिए TV, Radio, News Papers, Banners, Pamplates आदि माध्‍यमों को उपयोग में लेती हैं और उन्‍हीं Distribution Mediums में से एक माध्‍यम Internet है।

आप सोचेंगे कि विभिन्‍न कम्‍पनियों के Products का Internet से क्‍या लेना-देना है, तो हम आपको बता दें कि एक Survey के अनुसार ये पता चला है कि इस दुनियां में सोने और कमाने के बाद इन्‍सान टी वी देखने और Internet Surfing करने में अपना समय सबसे ज्‍यादा व्‍यतीत करता है।

इसका मतलब ये हुआ कि Internet Surfing दुनियां का चौथा सबसे ज्‍यादा किया जाने वाला काम है और यदि हम दूसरे नजरिए से देखें तो Internet ही एक एसा स्‍थान है, जहां किसी भी समय दुनियां के सबसे ज्‍यादा लोग एक साथ एक जगह पर इकट्ठे होते हैं। Internet के अलावा किसी भी अन्‍य जगह पर करोडों लोग एक साथ एक ही समय पर उपलब्‍ध नहीं होते। यानी Internet ही वह जगह है, जहां हर समय करोडों लोगों की भीड होती है। इसलिए विभिन्‍न कम्‍पनियां अपने Products की Advertising करने के लिए TV, Radio, News Papers, Banners के साथ ही Internet को भी Advertising Medium के रूप में उपयोग में लेती हैं।

विभिन्‍न कम्‍पनियां अपने Product की Advertising करने के लिए करोडों डॉलर का खर्चा करती हैं। यदि हम कहें कि दुनियां का सबसे ज्‍यादा पैसा केवल Advertisement पर खर्च होता है, तो गलत नहीं होगा। अपने Product की Advertisement के बदले में ये कम्‍पनियां उन लोगों को काफी पैसा देती हैं, जो इनके Products की Advertising करने के लिए माध्‍यम का काम करते हैं। उदाहरण के लिए जब ये कम्‍पनियां टी वी पर अपने Product की Advertising करती हैं, तब TV Channels के मालिक इन्‍हें हर Second की Ad के लिए लाखों रूपया चार्ज करते हैं। इसी तरह से जब ये कम्‍पनियां अपने Product की Advertising Radio या News Papers में करती हैं, तो ब‍दले में इन्‍हें Radio Channel या News Paper मालिकों को पैसा देना पडता है। इसी तरह से जब ये कम्‍पनियां अपने Product की Advertigins रोड के आस-पास, सिनेमा हॉल के आस-पास या एसे ही किसी Public Places पर करती हैं, तब इन्‍हें नगर पालिका या नगर निगम वालों को पैसा देना पडता है। यानी सारांश में कहें तो ये कम्‍पनियां किसी भी जगह पर किसी भी तरीके से Advertisement करने के बदले में किसी ना किसी को पैसा जरूर देती हैं।

TV Channels, Radio Stations, News Papers जैसे बडे माध्‍यमों तक तो एक आम आदमी की पहुंच नहीं है, लेकिन Internet एक एसा माध्‍यम है, जहां पर एक आम आदमी की ही सबसे ज्‍यादा पहुंच है क्‍योंकि सबसे ज्‍यादा आम आदमी Internet पर ही उपलब्‍ध होते हैं और कम्‍पनियां अपने Products की Advertising आम आदमी के लिए ही करती हैं। इसलिए ये कम्‍पनियां उन लोगों को भी Directly या Indirectly पैसा देना पसन्‍द करती हैं, जो इनके Products की Direct या Indirect तरीके से Advertising करते हैं। बस यहीं से हमारा काम चालू होता है। हम इन कम्‍पनियों के Products की किसी ना किसी तरीके से Advertising करते हैं और बदले में हमें इन कम्‍पनियों से कुछ ना कुछ Commision प्राप्‍त होता है।

Internet द्वारा पैसा कमाना आसान भी नहीं है और ना ही इतना मुश्किल कि उसे हम जैसे लोग ना कर सकें। इस काम में भी हमें काफी मेहनत करनी पडती है लेकिन जैसे-जैसे हमें काम करने का तरीका समझ में आता जाता है, हमारा काम आसान होता जाता है। शर्त ये है कि हमें इसे मजाक के रूप में नहीं बल्कि एक गंभीर व्‍यवसाय के रूप में लेना होगा और जिस तरह से किसी भी नए व्‍यवसाय में हमें समय देना पडता है, उसी तरह हमें इस व्‍यवसाय में भी कुछ समय देना होगा। अगर आपके पास एक Computer, एक Internet Connection व एक Bank Account है, तो आप इस काम को Join कर सकते हैं और बिना अपने घर से बाहर निकले हुए भी पर्याप्‍त पैसा कमा सकते हैं।
अगर आप Internet पर Side Income करना चाहते हैं और इस Business को मजाक के रूप में नहीं बल्कि एक Serious Business के रूप में देखते हैं, तो इस Online Business को Establish करने के लिए आपके पास कम से कम एक Blog तो होना ही चाहिए। क्‍योंकि Internet पर Side Income करने के लिए आपका ये Blog आपके और पैसों के बीच एक माध्‍यम के रूप में काम करता है। तो सबसे पहले आप अपना Blog बनाईए।  


Create a Blog
ज्‍यादातर लोग अपना Blog बनाने के बाद ये तय ही नहीं कर पाते कि वे किस विषय पर लिखें, ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग उनके Blog पर आऐं। लगभग सभी नए Bloggers के साथ यही समस्‍या रहती है। इसलिए सामान्‍यतया जब लोग अपना Blog बनाते हैं, तो वे अपने बारे में ही लिखना शुरू कर देते हैं, कि उन्‍हें क्‍या पसन्‍द है, उन्‍हें क्‍या पसन्‍द नहीं है, उनके साथ लोग कैसा व्‍यवहार करते हैं, वगेरह वगेरह। अगर आप भी केवल अपने बारे में ही लिखने जा रहे हैं, तो भूल जाईए कि लोग आपके Blog पर आऐंगे और आपके बारे में पढ कर खुश होंगे। लोगों को आपसे और आपकी जिन्‍दगी के रोने-धोने से कोई मतलब नहीं है। हां, अगर आपकी जिन्‍दगी कुछ Special तरह की है, तो आप अपने बारे में लिख सकते हैं और इस स्थिति में हो सकता है कि लोग आपके Blog पर आपके बारे में जानने के लिए भी आएं। लेकिन अगर आप Extra Ordinary नहीं हैं, तो फिर अपने बारे में मत लिखिए। बल्कि आप उनके बारे में लिखिए, जिन्‍हें लोग ज्‍यादा पसन्‍द करते हैं। तो सबसे पहले अपना ब्‍लॉग बनाईये। ब्‍लॉग बनाने से संबंधित सारी जानकारी प्राप्‍त करने के लिए आप  "Online Money with Blogging" EBook Download कर सकते हैं। ये पुस्‍तक हिन्‍दी भाषा में लिखी गई है और आप इसे पढकर आसानी से अपना ब्‍लॉग बना सकते हैं। 


Types of Bloggers
वास्‍तव में Internet की दुनियां में दो तरह के Blogger होते हैं यानी दो तरह के लोग Internet पर अपना Blog लिखते हैं। पहले तरह के Blogger वे होते हैं जो केवल आत्‍म संतुष्टि के लिए यानी अपने लिए लिखते हैं। वे अपने Blog में अपने साथ हो रही अच्‍छी या बुरी घटनाओं के बारे में लिखकर अपनी खुशी या तकलीफ का इजहार करते हैं। ज्‍यादातर लोग तो केवल अपनी भडास निकालने के लिए ही Blog लिखते हैं। ऐसे लोगों के Blog पर लोग दो-चार बार तो जाते हैं लेकिन बाद में उन्‍हें पता चल जाता है कि आखिर वह Blogger क्‍या और क्‍यों लिख रहा है और अपना रोना क्‍यों रो रहा है। इसलिए ऐसे Bloggers के Blog पर बहुत ही कम लोग बार-बार जाते हैं। दूसरे तरह के Blogger वे होते हैं, जो दुनियां को कुछ देना चाहते हैं और बदले में कुछ प्राप्‍त करना चाहते हैं। ऐसे Bloggers के Blog पर आपको हर बार कोई ना कोई अच्‍छी जानकारी जरूर मिलती है, जो कि आपके लिए Directly या Indirectly कभी ना कभी जरूर उपयोगी साबित होती है। हालांकि ऐसे Bloggers के Blog पर शुरूआत में कम लोग आते हैं, लेकिन जब एक बार कोई ऐसे Blog पर आ जाता है, तो वह उस Blog पर नई-नई जानकारियां प्राप्‍त करने के लिए बार-बार आता है। अब आप तय कीजिए कि आप किस तरह के Blogger बनना चाहते हैं। जाहिर है कि आप दूसरे तरह के Blogger ही बनना चाहेंगे, लेकिन अक्‍सर लोग दूसरे तरह के Blogger बनते-बनते पहले तरह के Blogger बन जाते हैं और ऐसा तब होता है, जब वे लोग सही विषय का चुनाव नहीं कर पाते अथवा सही विषय का चुनाव करने के बावजूद कुछ समय बाद भटक जाते हैं और किसी फालतू विषय पर Blog लिखना शुरू कर देते हैं। किसी भी विषय को चुनने से पहले आपको Internet Surfing करने वाले लोगों की Psychology यानी मनोविज्ञान को समझना होगा। यानी आपको Internet Surfers के दिमाग को पढना होगा और ये समझना होगा कि आखिर लोग Interner पर आते क्‍यों हैं ? क्‍या आपने कभी सोंचा है कि लोग Internet पर क्‍या करने के लिए आते हैं ?

हर इन्‍सान में एक लाईलाज बीमारी है और इस बीमारी का ईलाज करने के लिए सभी लोग वो सबकुछ करते हैं जो कर सकते हैं। इस बीमारी का ईलाज करने के लिए सभी लोग एक दूसरे से बात करते हैं, दोस्‍त बनाते हैं, रिश्‍ते-नाते और सम्‍बंध बनाते हैं, टी वी देखते हैं, रेडियो सुनते हैं, News Paper पढते हैं और Internet Surfing करते हैं और इन सब कामों को करने के लिए सभी लोग Directly या Indirectly पैसा खर्च करते हैं। क्‍या आप जानना चाहते हैं कि ये लाईलाज बीमारी क्‍या है?

इस लाईलाज बीमारी का नाम है जिज्ञासा यानी जानने की इच्‍छा और इस इच्‍छा को पूरा करने के लिए ही इन्‍सान लोगों से बात करता है, सम्‍बंध बनाता है, टी वी देखता है, रेडियो सुनता है और Internet पर Surfing करता है। इन्‍सानों की ये विशेषता होती है कि वे जब तक किसी चीज के बारे में जानते नहीं है, तब तक उसकी परवाह नहीं करते, लेकिन जब एक बार वे किसी चीज के बारे में देख या सुन लेते हैं, तो उस चीज को वे जब तक पूरी तरह से समझ नहीं लेते तब तक उनके दिमाग में खलबली मची रहती है और अपने दिमाग की इस उथल-पुथल को शान्‍त करने के लिए ही ज्‍यादातर लोग Internet Surfing करते हैं, क्‍योंकि वे कुछ ना कुछ जानना चाहते हैं, उन्‍हें किसी ना किसी जानकारी की तलाश है। चलिए, इसी बात को एक उदाहरण द्वारा समझते हैं। अगर आप Internet पर Surfing करते हैं, तो आप सबसे ज्‍यादा बार कौनसी Website Open करते हैं? कभी ध्‍यान नहीं दिया ? तो हम बताते हैं आपको। कोई भी Internet Surfer यदि सबसे ज्‍यादा बार कोई Website Open करता है, तो वह कोई ना कोई Search Engine जैसे कि Google, Yahoo, MSN, AOL आदि होता है। आप सबसे ज्‍यादा बार इन्‍हीं Websites को क्‍यों Open करते हैं? इसलिए, क्‍योंकि आपको किसी ना किसी विषय में कोई ना कोई जानकारी चाहिए होती है और ये Search Engines आपको आपकी वांछित जानकारी तक पहुंचाने का काम करते हैं। जब भी आपको किसी विषय की जानकारी चाहिए होती है, आप इन Search Engines के Search Box में अपने विषय से सम्‍बंधित कुछ Keywords यानी शब्‍द लिखते हैं और ये Search Engines उन Keywords से सम्‍बंधित Websites की List आपके सामने Display करते हैं। बस, जो आप कर रहे हैं वो ही लोग करते हैं और जिसके लिए आप कर रहे हैं उसी के लिए लोग करते हैं, यानी सभी लोग किसी ना किसी चीज के बारे में जानकारी प्राप्‍त करने के लिए ही Internet का प्रयोग करते हैं। 

पूरे Discussion को सरल शब्‍दों में कहें तो सभी लोगों को कोई ना कोई परेशानी है और उस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए उन्‍हें किसी ना किसी चीज या विषय के बारे में जानने की इच्‍छा है। उस चीज या विषय को जानने के लिए सभी लोग विभिन्‍न प्रकार के माध्‍यम जैसे कि आपसी सम्‍बंध, दोस्‍त, रिस्‍तेदार, टी वी चेनल्‍स्, रेडियो, अखबार आदि का प्रयोग करते हैं और जब लोगों की जिज्ञासा इन सभी माध्‍यमों से पूरी तरह से शान्‍त नहीं हो पाती, तब लोग Internet पर आते हैं और Surfing करके अपनी जिज्ञासा को शान्‍त करने की कोशिश करते हैं। 

तो इस पूरे Discussion से क्‍या सारांश निकला। सारांश ये निकला कि लोग आपके बारे में या आपकी समस्‍याओं के बारे में जानने के लिए Internet Surfing नहीं करते हैं, बल्कि उनकी खुद की कुछ समस्‍याएं हैं, जिनके समाधान प्राप्‍त करने के लिए वे Internet Surfing करते हैं। इसलिए आप अपने Blog में अपने बारे में नहीं बल्कि उस चीज, उस विषय या उस समस्‍या के बारे में लिखें, जिसकी लोगों को जरूरत है और केवल समस्‍या ही नहीं लिखें, बल्कि उस समस्‍या का समाधान भी बताएं। साथ ही आप इस बात का भी ध्‍यान रखें कि आप जिस विषय पर लिख रहे हैं, उसके बारे में पूरी जानकारी दें, ताकि एक Internet Surfer को आपके Blog पर आने के बाद किसी और Blog या Website पर जाने की जरूरत ही ना रहे। 

जब आप लोगों को पूरी, विस्‍त़त व बिल्‍कुल सही जानकारी देंगे, तो लोग बार-बार आपके Blog पर आएंगे और जितने ज्‍यादा Repeat Surfer आपके Blog पर आएंगे, लोग आप पर और आपके द्वारा दी जाने वाली जानकारियों पर उतना ही ज्‍यादा विश्‍वास करेंगे और जब लोग आप पर विश्‍वास करने लगेंगे, तब वे वो सबकुछ करेंगे, जो आप कहेंगे। आप उन्‍हें यदि कोई चीज बेचना चाहेंगे, तो वे खरीदेंगे। आप उनसे किसी जानकारी के बदले में Donation लेना चाहेंगे, तो वे आपको Donation देंगे। यानी वे सभी लोग वो सबकुछ करेंगे, जो आप चाहेंगे। 

अब आपको ये तय करना है कि लोग आखिर किस विषय पर जानकारी प्राप्‍त करना चाहते हैं और लोग जिस विषय पर जानकारी प्राप्‍त करना चाहते हैं, उसी विषय पर लिखना शुरू कीजिए। लेकिन आपको कैसे पता चलेगा कि लोगों को किस तरह की जानकारी की जरूरत है? अच्‍छा सवाल है, लेकिन इस सवाल का जवाब भी हम आपको Indirect तरीके से ही दे सकते हैं।

ज्‍यादातर लोग ये कहते हैं कि आपको उन विषयों को लिखने के लिए चुनना चाहिए, जिन्‍हें बहुत ज्‍यादा लोग खोजते हों और जिन पर बहुत कम Websites उपलब्‍ध हों। लेकिन हम इसका उल्‍टा कहते हैं। इस दुनियां में एसी कोई जानकारी नहीं है, जिसके सम्‍बंध में Internet पर कोई Website उपलब्‍ध ना हो और बहुत ज्‍यादा लोग उन जानकारियों को Search कर रहे हों। आप किसी भी Search Engine जैसे कि Google, Yahoo को Open कीजिए और उसके Search Text Box में कोई भी शब्‍द Type करके उस शब्‍द से सम्‍बंधित Websites को Search कीजिए। आपके सामने सैकडों नहीं लाखों Websites आ जाएंगी। इसका मतलब ये हुआ कि आप कभी कोई ऐसा विषय तय नहीं कर सकते, जिस पर पहले से कोई Website उपलब्‍ध ना हो, जिस पर पहले किसी ने ना लिखा हो और उस विषय की जरूरत बहुत सारे लोगों को हो। 

अपने Blog पर लिखने के लिए ऐसा विषय खोजने की कोशिश मत कीजिए, जिसके बारे में बहुत सारे लोगों को जानकारी चाहिए, बल्कि ऐसा विषय खोजने की कोशिश कीजिए, जिसके बारे में आप सबसे बेहतर जानकारी दे सकते हैं। यानी ये मत सोंचिए कि लोगों को किस विषय की जानकारी की सबसे ज्‍यादा जरूरत है बल्कि ये सोंचिए कि आप लोगों को सबसे बेहतर जानकारी किस विषय में दे सकते हैं। लोगों को तो सभी तरह की जानकारियों की जरूरत है और करोडों लोग करोडों तरह की जानकारियां प्राप्‍त करना चाहते हैं, इसलिए आप किसी भी विषय पर लिखें, उस विषय से सम्‍बंधित जानकारी चाहने वाले भी लाखों लोग हैं। 

इस दुनियां के हर इन्‍सान में कोई ना कोई विशेषता है। आप में भी होगी। कोई ना कोई ऐसा काम होगा, जिसे आप बहुत अच्‍छी तरह से कर सकते हैं। बस अपनी उस विशेषता को पहचानिए और उसी पर लिखना शुरू कीजिए। अगर आप वकील है, तो वकालत के बारे में लिखिए। अगर आप Photo Grapher हैं, तो Photo Graphy के बारे में लिखिए। अगर आपको राजनीजि के बारे में बात करने का शोक है, तो राजनीति पर लिखिए। यानी उस विषय को चुनिए, जिसके बारे में आप बेहतर तरीके से जानते हैं। अगर आपको कहानियां गढना आता है, तो अपनी भावनाओं को कहानियों के रूप में लिखिए। अगर आपको चुटकुले बनाना आता है, तो अपने चुटकुलों को अपने Blog पर लिखिए। यानी आप अपने अन्‍दर की उस विशेषता को पहचानिए, अपनी उस Hobby का पता लगाईए, जिसे पूरा करने में आपको सबसे ज्‍यादा मजा आता है। 

अगर आपको हर फिल्‍म देखने का व उनके बारे में बात करने का शोक है, तो अपने Blog पर हर फिल्‍म के बारे में विस्‍तार से अपने Comment कीजिए। फिल्‍में बनते व बनाते समय होने वाली विभिन्‍न प्रकार की उन घटनाओं का पता लगाईए, जिसके बारे में लोग नहीं जानते और उन घटनाओं को अपने Blog पर लिखिए। आप विभिन्‍न Actors के जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे में लिखिए। केवल Actors ही नहीं, बल्कि हर उस व्‍यक्ति के बारे में लिखिए, जो कि विशेष है या जिसने कोई ना कोई विशेष काम किया है। लोग विशेष लोगों के बारे में जानने के लिए हमेंशा उत्‍सुक रहते हैं, इसीलिए यदि आप इन विषयों पर लिखते हैं, तो आपके Blog पर काफी लोग आ सकते हैं, जो कि आपको Directly या Indirectly कुछ ना कुछ Income तो देते ही हैं। 

अगर आपको Cricket का शोक है, तो क्रिकेट से सम्‍बंधित उन विभिन्‍न Records व घटनाओं के बारे में अपने Blog पर बताईए, जिसके बारे में लोग नहीं जानते। विभिन्‍न Cricketers की जिन्‍दगी के बारे में जानिए और उनके जीवने के Amazing Moments को अपने Blog का हिस्‍सा बनाईए। बहुत सारे लोग आपके Blog पर आऐंगे। क्‍योंकि फिल्‍में व क्रि‍केट जैसे विषयों के बारे में जानने में लोगों को बहुत मजा आता है और इसी मजे को पाने के लिए लोग पैसा भी खर्च करते हैं। यानी आपको जिस काम को करने में सबसे ज्‍यादा मजा आता है और आप जिस काम को बिना ऊबे हुए जुनून के साथ लम्‍बे समय तक कर सकते हैं, आप अपने Blog में उसी काम के बारे में लिखिए क्‍योंकि वही वह विषय है, जिसके बारे में आप सबसे बेहतर जानते हैं और सबसे बेहतर तरीके से लिख सकते हैं। चलिए, अब आपको पता है कि आपको किस विषय पर अपने Blog में लिखना चाहिए। यानी आपने वो विषय चुन लिया है, जिस पर आप लिखना चाहते हैं। अब आपको ये तय करना है कि आप किसके‍ लिए लिखना चाहते हैं यानी आपका Targeted Traffic कौनसा है।

दूसरे शब्‍दों में कहें तो आप किसको Target करके लिखेंगे ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा Targeted Traffic आपको प्राप्‍त हो सके। आपके Blog पर आपके द्वारा दी जाने वाली जानकारी जिन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है वे लोग आपका Targeted Traffic कहलाते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप वकील हैं और अपने Blog पर वकालत से सम्‍बंधित जानकारियां देते हैं, तो वे सभी लोग आपके Blog को पढने के लिए आ सकते हैं, जिन्‍हें किसी ना किसी तरह की कानून सम्‍बंधित समस्‍या है और जिन लोगों को कानून से सम्‍बंधित किसी तरह की समस्‍या है, वे लोग आपका Targeted Traffic हैं। 

आपके Targeted Traffic का आपके Blog के विषय से भी गहरा सम्‍बंध होता है। इसलिए आपको ये भी तय करना होगा कि आप जिस विषय पर लोगों को जानकारी देना चाहते हैं, उस विषय से सम्‍बंधित जानकारी चाहने वाले लोग किस स्थिति में आपके Blog पर दी जाने वाली जानकारी को खरीदना पसन्‍द कर सकते हैं। अगर आप ऐसे लोगों को Target करके लिखते हैं, जो कि आपकी किसी जानकारी को खरीदने में Interested हो सकते हैं, तो आपके लिए Online Income करने का ये एक और बेहतर Option होता है, जिसमें आप अपने Targeted Traffic को किसी विषय से सम्‍बंधित पूरी जानकारी देने के बदले में उन्‍हें अपने किसी Information Product को खरीदने के लिए कह सकते हैं। लेकिन यदि आप उन लोगों के लिए लिख रहे हैं, जो कि किसी भी Information Product को खरीदने में Interested नहीं हो सकते, तब भी आपको चिन्‍ता करने की कोई जरूरत नहीं है। Internet पर कई ऐसे Advertisement उपलब्‍ध हैं, जिन्‍हें अपने Blog पर जगह देकर आप Indirect तरीके से Income कर सकते हैं। 

जब हम Targeted Traffic की बात करते हैं, तब आपको ये भी सोचना होता है कि आप अपने Blog पर जिन लोगों को Target करके लिख रहे हैं, वे लोग किस भाषा में जानकारी चाहते हैं। यानी यदि आप भारत के हिन्‍दी भाषी लोगों के लिए लिख रहे हैं, तो आपको हिन्‍दी भाषा में लिखना होगा। लेकिन यदि आप हिन्‍दी भाषा में अपने Blog पर लिखते हैं, तो फिर पर्याप्‍त Online Income उसी स्थिति में हो सकती है, जब आप कोई Online Information Product Sell करते हों और आपका Targeted Traffic उस Online Information Product को खरीदने में भी Interested हो। क्‍योंकि ज्‍यादातर Online Advertisement करने वाली कम्‍पनियां हिन्‍दी भाषा और भारतीय लोगों के लिए अपने Products की Advertising नहीं करती हैं। ज्‍यादातर कम्‍पनियां भारतीय लोगों के लिए अपने Products की Advertising इसलिए नहीं करती हैं, क्‍योंकि आज भी भारतीय लोग Online खरीदारी नहीं करते हैं और आने वाले लम्‍बे समय तक कर भी नहीं सकते। अब आप पूछेंगे कि क्‍यों नहीं कर सकते? कुछ ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से भारतीय लोग Online खरीदारी नहीं कर सकते। सबसे पहला कारण ये है कि आज भी भारत के केवल लगभग 5 करोड लोग ही Internet का इस्‍तेमाल करते हैं और उनमें भी मुश्किल से 1 करोड लोग ही Internet को गंभीरता से समझते हुए इसका इस्‍तेमाल करते हैं। बाकी के लोग तो केवल Mail Check करने या Mail Receive करने से सम्‍बंधित जानकारियों तक ही सीमित हैं। ज्‍यादातर भारतीय लोग तो Internet का इस्‍तेमाल केवल Online Songs, Movies, Wallpapers, Screensavers व Pirated Softwares को Download करने के लिए ही करते हैं। यानी पहली बात तो यही है कि ज्‍यादातर भारतीय Internet Surfers तो E-Commerce के बारे में जानते ही नहीं हैं और जो लोग जानते हैं, वे लोग Online खरीदारी करने में डरते हैं। दूसरा कारण ये है कि यदि भारतीय लोग Online खरीदारी करना भी चाहते हैं, तो वे Online खरीदारी कर ही नहीं सकते। वे Online खरीदारी इसलिए नहीं कर सकते, क्‍योंकि हमारे देश में आज भी Online Banking की सुविधा प्राप्‍त करने के लिए एक आदमी को काफी पापड बेलने पडते हैं। एक आम आदमी को तो Bank से अपना Detailed Statement प्राप्‍त करने में भी नानी याद आ जाती है। विभिन्‍न Banks एक आम आदमी को Online Banking की सुविधा ही नहीं देती। ये Banks केवल अमीर व प्रभावशाली लोगों को ही Online Banking की सुविधा देती हैं। यदि एक आम आदमी Online Banking जैसी सुविधा प्राप्‍त करना चाहे, तो सबसे पहले तो ये Bank वाले उस आम आदमी से ठीक से बात ही नहीं करते और अगर बात करते भी हैं, तो ज्‍यादातर Bankers को या तो इस Online Banking के बारे में जानकारी ही नहीं होती और यदि जानकारी होती है, तो अपने आलस के कारण वे एक आम आदमी को ये सुविधा मुहैया नहीं करवाते और जब तक एक आम आदमी को Online Banking जैसी सुविधा प्राप्‍त नहीं है, तब तक वह विभिन्‍न प्रकार के Online Payments कैसे कर सकता है। 

अब चूंकि ज्‍यादातर भारतीय लोगों के लिए Online खरीदारी करना आज भी एक टेढी खीर है, इसलिए विभिन्‍न कम्‍पनियां भारतीय भाषाओं में बनी Websites व Blogs पर अपने Products की Advertising करना तब तक पसन्‍द नहीं करतीं, जब तक कि उन Websites या Blogs पर लाखों लोग ना आते हों। इसलिए इन Companies के Products की महंगी Advertising तो आपको अपने Blog पर मिलेगी नहीं और जब इन Advertisng Companies के Products की महंगी Advertising आपको अपने Blog पर प्राप्‍त नहीं होगी, तब तक आपको Indirect तरीके से प्राप्‍त होने वाली Online Income काफी कम प्राप्‍त होगी। आप खुद ही सोंचिए, जिस जगह पर रखी गई चीज बिकने की सम्‍भावना ही ना हो, वहां पर चीज रखने के लिए कम्‍पनियां पैसा खर्च क्‍यों‍ करेंगी। इसलिए विभिन्‍न कम्‍पनियां भी अपने Products की Advertising उसी Blog / Website पर करना पसन्‍द करती हैं, जहां पर आने वाले लोग उनके Products को खरीदने में सक्षम हों और ऐसा केवल विकसित देशों यानी विदेशों में होता है। इसलिए ज्‍यादातर कम्‍पनियां उन लोगों के Blog या Website पर अपने Advertisements देती हैं, जो विदेशी भाषाओं में व विकसित देशों के लोगों के लिए लिखते हैं।

यदि सारांश के रूप में कहें तो हम तो आपसे यही कहेंगे कि यदि आप विभिन्‍न कम्‍पनियों के Products की Advertisement करके Online Income करना चाहते हैं, तो हिन्‍दी भाषा को भूल जाईए। Internet Advertisement की दुनियां में हिन्‍दी का कोई महत्‍व नहीं है। लेकिन यदि आप हिन्‍दी में ही लिखना चाहते हैं, तो समझ लीजिए कि आप बहुत ही छोटे Area में कमाने की कोशिश कर रहे हैं, क्‍योंकि हिन्‍दी केवल भारत में ही चलती है और यदि हम सही शब्‍दों में कहें तो भारत में भी केवल उत्‍तर भारत के कुछ ही राज्‍यों में हिन्‍दी भाषा का प्रयोग किया जाता है। यानी हमारे देश में ही हिन्‍दी भाषा को केवल 30% लोग ही उपयोग में लेते हैं, तो बाकी के देशों में लोग हिन्‍दी उपयोग में लेते होंगे, ये बात तो सोंचना ही बेवकूफी है और जब हिन्‍दी भाषा को इतने कम लोग उपयोग में लेते हैं, तो फिर सोंचिए कि अगर आप हिन्‍दी भाषा में Blogging करते हैं, तो आपके Blog पर कितने लोग आऐंगे, आपके Product को कितने लोग खरीदेंगे और आपको कितनी Online Income होगी क्‍योंकि यदि आप हिन्‍दी भाषा में लिखेंगे तो आपको विभिन्‍न कम्‍पनियों के महंगे Advertisement तो मिलेंगे नहीं और जब आपको महंगे Advertisement नहीं मिलेंगे तो दूसरा तरीका यही है कि आप अपने Blog के Through कोई ना कोई Product Sell करें, फिर चाहे वह कोई Physical Product हो या Information Product. और जैसाकि हमने पहले कहा कि भारतीय लोग आज भी Online खरीदारी या तो करते नहीं है या कर ही नहीं सकते, इसलिए आपके Online Income प्राप्‍त करने की एक सीमा बन जाएगी, जो कि आपके लिए पर्याप्‍त नहीं होगी। 

ऐसा नहीं है कि हिन्‍दी भाषा में Blogging करने पर आपको Online Income नहीं होगी और ऐसा भी नहीं है कि आपको हिन्‍दी Blog पर Advertisement नहीं मिलेगी। कई एसी Companies हैं, जो हिन्‍दी Blog पर भी अपने Products की Advertisng करती हैं, लेकिन Hindi Blogging में आपकी Online Income सीमित ही रहेगी। क्‍योंकि हिन्‍दी Blog पर केवल भारतीय कम्‍‍पनियां ही Advertisement देंगी और भारतीय कम्‍पनियां आपको आपका Commission रूपयों में Pay करेंगी, जबकि यदि आपके Blog पर विदेशी कम्‍पनियां अपने Products की Advertisement देती हैं, तो वे आपको Dollars में Pay करेंगी। आप ही सोंचिए कि यदि आपको आपके Blog पर एक रूपए की भारतीय Advertising मिलती है तो वहीं आपको आपके Blog पर $1 यानी एक डॉलर की विदेशी Advertising मिल सकती है, जो कि भारत के लगभग 45 Rs. यानी 45 रूपयों के बराबर होती है। अब आप ही सोंचिए कि आपको भारतीय Advertising चाहिए या विदेशी। यदि आप हिन्‍दी में Blogging करना चाहते हैं, तो आपको एक रूपये से सन्‍तुष्‍ट होना होगा लेकिन य‍दि आप विदेशी Advertising चाहते हैं, तो आपको हिन्‍दी Blogging को छोडना होगा। आप स्‍वयं ही तय कीजिए कि आप किस भाषा में और किन लोगों के लिए Advertising करना चाहते हैं ? भारतीय भाषा में भारतीय लोगों के लिए या विदेशी भाषा में विदेशी लोगों के लिए। 

चलिए, अब आप जानते हैं कि हिन्‍दी भाषा के Blog से आप ज्‍यादा Income नहीं कर सकते, तो फिर अब आप कौनसी भाषा में Blogging करेंगे? जाहिर सी बात है कि आपको English भाषा को अपनाना होगा। यदि हम Internet इस्‍तेमाल करने वाले लोगों की बात करें, तो सबसे ज्‍यादा चीनी लोग Internet का इस्‍तेमाल करते हैं। चीन के बाद जापान के लोग और तीसरे स्‍थान पर भारत के लोग आते हैं। यानी यदि Internet का इस्‍तेमाल करने वाले तीसरे सबसे ज्‍यादा लोगों की बात करें, तो वे भारतीय लोग हैं, लेकिन जब हम भाषा की बात करते हैं तब Internet की दुनियां में 30% लोग English Use करते हैं, 19% लोग Chinese Use करते हैं और 36% लोग Spanish, Japanese, Franch, German, Arabic, Portuguese, Korean व Italian Language Use करते हैं। बाकी के बचे हुए 15% लोग दुनियां की बाकी बची हुई सभी अन्‍य भाषाओं को उपयोग में लेते हैं। इसलिए Hindi Blogging से पैसा बनाना तो मुश्किल है। 

English ही एक ऐसी भाषा है, जिसे लगभग सारी दुनियां के लोग समझते हैं। English Language की एक दूसरी विशेषता ये भी है कि इसे Google के Language Translator का प्रयोग करके कई अन्‍य English Related Languages में Convert किया जा सकता है, इसलिए English Blogging से केवल 30% Internet Users ही Cover नहीं होते, बल्कि लगभग 100% Internet Users Cover होते हैं। इसलिए यदि आप Internet पर पैसा कमाना चाहते हैं, तो आपको English Blogging को ही महत्‍व देना होगा। हिन्‍दी में भी लिखिए, लेकिन उस स्थिति में ज्‍यादा पैसा कमाने की उम्‍मीद मत कीजिए। और हां! हमने आपको जो आंकडे बताए हैं, ये आंकडे हमने हमारी मर्जी से नहीं लिखे। यदि आप विभिन्‍न देशों के Users, उनके Internet Use करने के तरीके, विभिन्‍न देशों की Populations आदि विभिन्‍न प्रकार की Internet Status के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप भी http://internetworldstat.com नाम की Website पर जा सकते हैं। हमने ये सारी जानकारियां इसी Website से प्राप्‍त की हैं। तो अब इस पूरे Discussion का आप निम्‍न सारांश निकाल सकते हैं:


  1. इस दुनियां के सभी लोग किसी ना किसी परेशानी से परेशान हैं और उस परेशानी का समाधान प्राप्‍त करने के लिए वे अपनी समस्‍या से सम्‍बंधित विभिन्‍न प्रकार की पूरी जानकारी प्राप्‍त करना चाहते हैं। जानकारी प्राप्‍त करने के लिए अन्‍त में सभी लोग Internet पर आते हैं, इसलिए आपको अपने Blog द्वारा उन्‍हें किसी ना किसी तरह की अच्‍छी और पूरी जानकारी देनी पडेगी, तभी ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग बार-बार आपके Blog पर आऐंगे।

  2. जानकारी देने के लिए आपको ऐसे विषय को चुनना होगा, जिसे आप सबसे ज्‍यादा पसन्‍द करते हैं। क्‍योंकि आप जिस विषय को सबसे ज्‍यादा पसन्‍द करते हैं, उसी विषय के बारे में आप लोगों को सबसे ज्‍यादा बेहतर व सही जानकारी दे सकते हैं।



  3. आपको अपने Targeted Traffic को पहचानना होगा और उस Targeted Traffic के आधार पर लिखना होगा। यदि आप ज्‍यादा पैसा कमाना चाहते हैं, तो आपको विदेशी मार्केट पकडना होगा और विदेशी मार्केट पकडने के लिए आपको अपने Blog पर विदेशियों के लिए लिखना होगा यानी आपको अपने Blog पर English भाषा में लिखना होगा। 

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